13 की बर्खास्तगी , 19 निलंबित, 28 की वेतनवृद्धि रुकी

रायगढ़ । बेहतर पुलिसिंग को लेकर देश के टॉप टेन ब्यूरोक्रेट्स मे शामिल जिले के पुलिस कप्तान आईपीएस संतोष कुमार सिंह ने एक तरफ विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को ईमानदार दायित्व निवर्हन पर शाबासी और तमगा दिया है तो दूसरी तरफ कर्तव्य मे लापरवाही बरतने वाले जवानों को नापने मे भी कोई कसर नहीं छोडी है। पुलिस विभाग के आंकडे गवाह हैं कि महज 16 माह के कार्यकाल मे एसपी संतोष कुमार ने प्रतिष्ठा , विश्वास , साहस और अनुशासन से जुडे महत्वपूर्ण पेशे के साथ लापरवाही तथा भ्रष्टाचार करने वाले पांच दर्जन पुलिसकर्मियों पर बर्खास्तगी से लेकर वेतनवृद्धि रोकने तक की कार्रवाई की है , जो पुलिसिंग मे कसावट के दृष्टिकोण से उठाया गया सबसे कठोर कदम है।

पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने रायगढ जिले की कमान संभालने के साथ ही पुलिस की छवि बदलने की दिशा मे नवाचार शुरु कर दिया था। इस कडी मे एक तरफ एसपी सिंह ने जहां थानाध्यक्षों व विभागीय कर्मचारियों की नियत अंतराल मे बैठकें लेकर कार्यशैली बदलने के टिप्स दिये वहीं रचनात्मक सामाजिक गतिविधियों मे पुलिस और आम जन के साथ ढेरों हितैषी अभियान का नेतृत्व किया। पीएचक्यू की तर्ज पर जिला पुलिस के बीच कॉप आफ द मंथ जैसी स्वस्थ्य स्पर्धा की शुरुआत कर आईपीएस संतोष सिंह ने जहां थानों के प्रदर्शन मे सुधार किया वहीं सामाजिक पुलिसिंग की विश्वस्तरीय मिसाल कायम करते हुये रायगढ़ जिले को एक
नई पहचान दिलाई।
इन तमाम गतिविधियों के साथ साथ कर्तव्य मे लापरवाही बरतने वाले जवानों को भी पुलिस अधीक्षक ने कडा सबक सिखाया है। विभागीय आंकडे बताते हैं कि एसपी सिंह ने अपने करीब 16 माह के कार्यकाल मे 60 पुलिसकर्मियों पर दण्डात्मक कार्रवाई की है। इनमे से 13 जवानों को आपराधिक गतिविधियों मे लिप्त होने व अन्य गंभीर शिकायतों की पुष्ट रिपोर्ट के आधार पर सेवा से बर्खास्त खर दिया गया है जबकि अनुपस्थिति तथा लापरवाही बरतने वाले 19 जवानों को निलंबित किया गया है। कार्रवाई की इसी कडी मे 28 जवानों की वेतनवृद्धि रोकी गई है तथा 10 जवानों पर अभी भी जांच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा दो सप्ताह पूर्व करीब चार दर्जन पुलिसकर्मियों के तबादले के दौरान भी एसपी ने दर्जनों ऐसे जवानों के थाने बदले थे जिनपर लापरवाही तथा भ्रष्टाचार के आरोप संबंधी शिकायतें मिल रहीं थी। इन कार्रवाई के माध्यम से एसपी ने महकमे और समाज के बीच अपनी कथनी और करनी की विश्वसनीयता व कटिबद्धता जाहिर की है। विभागीय कसावट व पुलिस के मूल कर्तव्य के प्रति बेहद सजग सर्वश्रेष्ठ ब्यूरोक्रेट् आईपीएस संतोष सिंह का स्पष्ट कहना है कि जब तक विभागीय लाचारी और लापरवाही को प्राश्रय मिलता रहेगा पुलिसिंग का मुख्य उद्देश्य तथा जनविश्वास की संभावना संदेहास्पद बनी रहेगी। एसपी ने विभागीय स्तर पर लापरवाह कर्मियों के विरुद्ध जांच व कार्रवाई की प्रक्रिया सतत जारी रहने की बात भी कही है। गौरतलब है कि एसपी संतोष कुमार सिंह की इस कडी कार्रवाई के इतर विभागीय कर्मचारियों को लेकर उनकी संवेदनशीलता भी कमतर नहीं है। इसकी एक बडी मिसाल नीजि और सार्वजनिक जीवन मे अवसाद से घिरकर पुलिस जवानों के द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरों के बीच एसपी के निर्देश पर जिला पुलिस की मनोवैज्ञानिक जांच व परामर्श के लिए लगाये गये कैम्प से जाहिर होती है। साथ ही पुलिस की हर छोटी बडी उपलब्धि पर एसपी ने जवानों को सम्मानित ,पुरस्कृत करने व हौंसला बढाने का कोई मौका कभी नहीं छोडा।