जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे वीरेंद्र सिंह बघेल ने कहा मजदूरों के वीडियो फोटो और दुर्दशा देखकर मानवता भी शरमा जाए

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गौरेला पेंड्रा मरवाही

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छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह बघेल ने कहा है कि वर्तमान में प्रवासी मजदूरों की बदहाली देखते हुए उनके लिए नए नियम बनाए जाएं ताकि उन्हें राहत मिल सके 20 लाख करोड़ बजट ले आये खुशी हुई पर क्या इससे उन गरीब मजदूरों की हालत और जो इस दुनिया को छोड़ के चल दिये उनको कुछ लाभ मिलेगा ।
सरकार प्रशासन मजदूरों के लिये नियम निर्देश बनाये
उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी ऐसे भी हैं जो लगातार लोगों की मदद में जुटे हैं लेकिन सभी नहीं। पुलिस को यह समझना चाहिए कि यह आपदाकाल है और इस वक्त में पुलिस की जिम्मेदारी बेहद अहम हो जाती है। विभिन्न प्रदेश सरकारों को और जिला स्तर के अधिकारियों को पुलिसकर्मियों को आदेश देना चाहिए कि अगर वे किसी भी मजदूर को कहीं भी पैदल चलते देखते हैं, तो उसे तत्काल रोककर शेल्टर होम में रुकवाया जाए। स्थानीय प्रशासन से बात करके उनके खाने-पीने की व्यवस्था कराई जाए और फिर उनकी मेडिकल जांच कराने के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उनके गांव भेजा जाए।

आगे की व्यवस्था उनका स्थानीय प्रशासन उसी के अनुरूप करे, जिसके अनुरूप ट्रेनों-बसों से लाए जा रहे श्रमिकों के साथ की जा रही है
छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रवक्ता ने भूपेश सरकार से अनुरोध किया है कि कम से कम अपने राज्य में जो बाहर से श्रमिक आ रहे है उनको तत्कलीन घर पहुँचाने की व्यवस्था के साथ खाने पीने की भी व्यवस्था करें नही तो बहुत देरी हो जाएगी ।इन प्रवासी मजदूरोंको देखकर मानवता भी शर्मसार हो जा रही है। दुख देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। सरकार पहले मजदूरों के लिये कुछ करें फिर अपना योजना बताया। एक घटना एक बैलगाड़ी में एक बैल के साथ चलता ये बच्चा और दूसरा मध्य प्रदेश की घटना बेरोजगारी और बेबसी ने मजदूरों को मजबूर बना दिया है. मजदूरों की रोंगटें खड़े कर देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं. ऐसी ही एक कहानी सामने आई है मध्यप्रदेश से, जहां नासिक से सतना अपने घर के लिए पैदल निकली एक गर्भवती महिला ने ना सिर्फ सड़क के किनारे बच्चे को जन्म दिया बल्कि उसके पैदा होने के एक घंटे बाद ही वो 150 किलोमीटर का सफर तय कर अपने घर पहुंची. फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.
लोग घर मे बैठ के अच्छा खाना सब अच्छा अच्छा कर रहें पर इन गरीब श्रमिकों के बारे में कोई नही सोच रहा वो मजदूर किसी प्रदेश का हो हर राज्य का कर्तव्य है कि उसकी देखभाल के साथ उनको सकुशल उनको घर पहुँचाये

बड़ी विडंबना है कि छत्तीसगढ़ के बाहर से छत्तीसगढ़ आने वाले मजदूरों को राहत मिलती है परंतु छत्तीसगढ़ से अन्य राज्य के जो मजदूर पैदल जा रहे है उन्हें किसी भी प्रकार की कोई सहायता या मदद जो मिलनी चाहिए नही मिल रही है इस लाकंडाउन का यदि सबसे ज्यादा पीड़ा और कष्ट किसी को हुआ है तो वो शायद मजदूर ही है जिनकी मेहनत के कारण ही हमे सब प्रकार की सुख सुविधा मिलती है पर आज यही मेहनती मजदूर अपने जीवन की भीख मांग रहा है जो दुर्भाग्य जनक हैं

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