रमजान के मुबारक महीने में अल्लाह अपने हबीब के सदके हम सबको महफूज़ रखे- इमाम रजा साबरी 

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सक्ती। कोरोना की महामारी और लॉकडाउन के बीच रमजान का पाक महीना शनिवार से शुरू हो गया है। इस्लाम में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। शुक्रवार की शाम बदली होंने के कारण सक्ती मे चांद नही दिखा लेकिन रायपुर से तसदीद करने के बाद सक्ती जामा मस्जिद के इमाम रजा साबरी ने रमजान की घोषणा कर दी और मुल्क में कोरोना वायरस जैसी बीमारी से हिफाजत की दुआ भी मांगी, रमज़ान या रमदान इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना होता है. रमजान एक अरेबिक शब्द है। ये अरेबिक के रमीदा और रमद शब्द से मिलकर बना है। इसका मतलब चिलचिलाती गर्मी और सूखापन होता है। रमजान के इस पूरे महीने मे मुस्लिमों द्वारा रोजे रखे जाते हैं, मान्यता है कि रोजे रखने वाले व्यक्ति की ईश्वर द्वारा उसके सभी गुनाहों की माफी दी जाती है। मुस्लिम समुदाय में रमजान को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी दौरान इस्लामिक पैगम्बर मोहम्मद के सामने कुरान की पहली झलक पेश की गई थी। लिहाजा रमजान को कुरान के जश्न का भी मौका माना जाता है। रमजान के रोजे के दौरान रोजेदार पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए रहते हैं। हर दिन सुबह सूरज उगने से पहले जो अन्न ग्रहण किया जाता है। उसे सेहरी कहते हैं, जबकि शाम ढलने पर रोजेदार जो अन्न ग्रहण करते है उसे इफ्तार कहते हैं। रमजान के महीने मस्जिद मे ऐशा के बाद सामूहिक रूप से तरावीह की विशेष नमाज भी अदा की जाती है लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार नमाज घर पे ही पढ़ने के लिए मस्जिद ने द्वारा एडवाइजरी जारी की गई  है,घर पर ही  नमाज और कुरआन की कसरत से तिलावत करे और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए रोजा घर पर ही खोलें

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