वन विभाग का सघन अभियान निरंतर जारी

करीब 8 लाख रूपए मूल्य के 23 घनमीटर अवैध काष्ठ की भी जब्ती
रायपुर, । वन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशन में वन विभाग द्वारा राज्य भर में वन अपराधों की रोकथाम के लिए अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। इसके तहत 14 सितम्बर से अब तक एक सप्ताह के भीतर वन मंडल रायगढ़ के अंतर्गत जांच के दौरान खामियां पाये जाने के कारण एक आरा मिल और एक फर्नीचर मार्ट को सील कर दिया गया है। इनमें आर.के. फर्नीचर एंड टिम्बर रायगढ़ तथा रायगढ़ के ही मौदहापारा रोड स्थित संजय साॅ मिल शामिल है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में वन मंडलाधिकारी रायगढ़ श्री मनोज पांडे के निर्देशानुसार गठित टीम द्वारा आरा मिलों में पहुंचकर सघन जांच की कार्रवाई निरंतर जारी है। टीम द्वारा जांच के दौरान आरा मिलों का अवैध तरीके से संचालन होने अथवा वहां लकड़ी के अवैध लट्ठे पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ तत्काल कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस कड़ी में गत 18 सितम्बर को टीम द्वारा जांच में पाया गया कि रायगढ़ के संजय साॅ आरा मिल संचालक द्वारा बिना अनुमति के साॅ ट्राॅली स्थापित कर चलायी जा रही थी। इसको केवल आरा मशीन चलाने की अनुमति थी, ट्राॅली की नही। इसके कारण वहां बिना अनुमति चल रहे पावर साॅ मशीन तथा ट्राली को सील कर दिया गया है। संजय साॅ मिल द्वारा बिना अनुमति के साॅ ट्राॅली तथा 15 एच.पी. का मोटर लगाकर संचालन किया जा रहा था, जो अवैधानिक है। इन्हें व्यापारी का अनुज्ञप्ति प्राप्त है, लेकिन विनिर्माता का अनुज्ञप्ति नहीं होने पर भी इनके द्वारा अवैधानिक रूप से कार्य किया जा रहा था। इसी तरह संजय साॅ मिल का व्यक्तिगत हैमर वर्ष 2016 के लिए पंजीकृत था, लेकिन इनके द्वारा नवीनीकरण न कराते हुए उक्त हैमर को अभी तक अवैधानिक रूप से उपयोग किया जा रहा था। इसके कारण संजय साॅ मिल को सील किया जाकर उसके विद्युत विच्छेद के लिए विद्युत विभाग को पत्र भेजा गया है।
संजय साॅ मिल में अभिलेखों की जांच करने पर यह पाया गया कि उसके द्वारा आर.के. मार्ट एंड टिम्बर रायगढ़ से वनोपज का चिरान किया जाता रहा है। टीम द्वारा तब विगत दिवस आर.के. मार्ट एंड टिम्बर छातामुड़ा के आरा मिल में भी दबिश दी गई। वहां मौके पर बिना हैमर निशान के साल के 153 नग लट्ठे और बीजा के 11 नग लट्ठे कुल 23 घनमीटर के करीब अवैध काष्ठ का भंडारण पाया गया, जिसे मौके पर वन विभाग द्वारा जप्त कर उससे विक्रय काष्ठागार उर्दना में भंडारण कर दिया गया है। जप्त किए गए लकड़ी का अनुमानित मूल्य लगभग 8 लाख रूपए है। उक्त कार्रवाई में वन क्षेत्रपाल श्रीमती लीला पटेल सहित प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेश्वर मिश्रा तथा दीनबंधु प्रधान व गोवर्धन राठौर आदि उड़नदस्ता दल के अमले का सराहनीय योगदान रहा।

आखिर कैसे प्लाप हो गया सूचनातंत्र । बात सोचने वाली बात यह है कि वन मंत्री के आदेश के बाद जांच जारी किया गया है और कुछ जगह को शील कर खुद ही वन विभाग अपना पिठ थपथपा रहा है लेकिन कुछ सवाल अब भी बना हुआ है इससे पहले वन विभाग का सूचना तंत्र क्या कर रहा था, इससे पहले वन विभाग के पास कर्मचारियो व ससाधन होने के बाद भी आरा मिल पर छापा क्यों नहीं मारा गया, रायगढ़ शहर के 10 किलोमीटर के दायरे में करीब करीब दो दर्जन से ही अधिक आरा मिल चल रहा है वहाँ जाँच क्यों नही किया गया, सबसे बड़ी बात यह है कि वन विभाग का सुचना तंत्र केसे कमजोर हो गया शहर के बीचों बीच लकड़ी कैसे पहुचा ,इससे पहले कितने मार्ट व फनीचर पर कार्यवाही किया गया है