सुराजी गांव योजनाजैविक खाद उत्पादन से 16 महिला समूह लाभान्वित

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जिला जनसंपर्क कार्यालय बिलासपुर से प्राप्त जानकारी अनुसार

बिलासपुर 22 अप्रैल 2020। जिले के सुराजी गांव योजना के अंतर्गत विभिन्न गौठानों में 384 वर्मी टांका, 157 वर्मी बेड एवं 339 नाडेप टांका निर्माण किया गया है। इन निर्मित वर्मी टांका एवं वर्मी बेड से 43.07 टन वर्मी खाद और नाडेप टांके से 88.50 टन नाडेप खाद का उत्पादन किया गया है। उत्पादित वर्मी खाद को वन एवं उद्यान विभाग और उन्नतशील किसानों द्वारा 25.42 टन खाद क्रय किया गया है। शेष खाद विक्रय हेतु गौठानों के समितियों के पास उपलब्ध है। इन वर्मी खाद उत्पादन से सोलह महिला समूह लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें नेवरा गौठान, लाखासार, हथनी, सिलदहा, शिवतराई, गुल्लीडांड़, सेमरदर्री, धनगवां, सोन बचरवार एवं बारी उमराव गौठान की महिला समूह शामिल है। इन महिला समूहों के सदस्यों को कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। आज के बदलते वातावरण में जैविक खाद अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है। इसका उपयोग कर फसलों के उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। रासायनिक खाद की तुलना में लागत भी कम आती है। इससे किसान कम लागत में खेती कर अच्छी आमदनी ले सकते हैं। जिले में निर्मित गौठानों से संबद्ध महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे महिला समूह के जीविकोपार्जन में जैविक खाद का उत्पादन सहायक सिद्ध हो रहा है। साथ ही किसानों को कम कीमत में जैविक खाद मिल रहा है।
इसी प्रकार गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में सुराजी गांव योजना अंतर्गत निर्मित गौठानों में 100 वर्मी टांका, 47 वर्मी बेड एवं 96 नाडेप टांका निर्माण किया गया है। इनमें से उत्पादित 8.58 टन खाद का क्रय शासकीय एवं उन्नतशील कृषकों द्वारा किया गया है। शेष खाद गौठानों के समितियों के पास उपलब्ध है।

जैविक खाद के विषय जानकारी प्राप्त करती महिलाए

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