5 साल बाद भी छात्रावास अधीक्षकों की परिवीक्षा अवधि नहीं हुई समाप्त

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बी पी पटेल भटगांव। प्रदेश भर में आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा प्रदान करने के लिए आदिवासी विकास विभाग द्वारा छात्रावासों की सुविधा प्रदान की गई है, इन छात्रावासों के संचालन हेतु विभाग द्वारा 2015 और 16 में व्यापम के माध्यम से नियमित अधीक्षकों की भर्ती की गई । किसी भी शासकीय कर्मचारी के लिए नियम यह कहता है कि नियुक्ति तिथि से 2 वर्ष तक परिवीक्षा अवधि होगी जिसके बाद उनका नियमितीकरण किया जाएगा लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेशभर में कार्यरत छात्रावास अधीक्षकों की परिवीक्षा अवधि 5 साल बाद भी विभाग द्वारा समाप्त नहीं की गई है, विभाग की लालफीताशाही रवैया से निराश होकर अधीक्षकों ने उच्च न्यायालय की शरण ली जहां न्यायालय द्वारा 4 माह के भीतर सभी अधीक्षकों की परिवीक्षा अवधि समाप्ति का आदेश विभाग को दिया इसके बाद भी विभाग द्वारा सिर्फ 347 अधीक्षकों का नियमितीकरण किया गया और अभी भी 863 अधीक्षकों का नियमितीकरण आज तक नहीं हो सका है । छत्तीसगढ़ छात्रावास अधीक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष अभय मोदक ने बताया कि संघ के द्वारा कई बार मंत्रियों एवं विधायकों को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका है और वर्तमान समय में ट्विटर के माध्यम से अधीक्षक अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं ।

विडंबना की बात यह है कि एक और जहां विभाग अधीक्षकों से 24 घंटे ड्यूटी लेकर छात्रावास की व्यवस्था सुधारने की कवायद में रहता है और दूसरी ओर अधीक्षकों को उनकी मूलभूत अधिकारों से भी वंचित कर रहा है .अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस पूरे प्रकरण को किस तरह निपटाता है ।

क्वारंटाइन सेंटर में भी कर रहें हैं 24 घंटे ड्यूटी

वैश्विक महामारी कोविड 19 के संक्रमण से बचने के लिए प्रदेश स्तर छात्रावासों को पर क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया जिसमें अधीक्षकों की ड्यूटी नोडल अधिकारी के रूप में बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के लगाई गई है वहां भी उन्हें संक्रमण से खतरा बना हुआ है जिसमें जशपुर जिले के एक अधीक्षक कोरॉना पॉजिटिव पाए गए ।

5 साल बाद भी सेवा शर्तें तय नहीं

विभाग के लचर रवैया के कारण हालात यह है कि आज तक छात्रावास अधीक्षक श्रेणी द के पदों के लिए सेवा शर्तें तक निर्धारित नहीं की गई है जिसके कारण कार्य के घंटे को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रहती है विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के रिपोर्टों का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा साथ ही साथ श्रम कानूनों का भी खुलेआम विभाग द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है ।

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