आर्थिक तंगी के कारण पदमश्री निर्मलकर की पत्नी के बाद छॉलीवुउ अभिनेत्री ने भी कह दिया दुनिया को अलविदा

0
9
अपनी धरोहरों को सहेजने में नाकाम हो रही केन्द्र और राज्य सरकार
आर्थिक तंगी के कारण मामूली बिमारी का उपचार नही करापाने से अभिनेत्री नेहा साहू की हुई मौत
फिल्मों में काम करना परिवारवालों को गुजरा नागवार तो राजनांदगांव में अकेली रहती थी अभिनेत्री 
छॉलीवुड। किसी भी देश और राज्य की संस्कृति को बचाने वाले और वहां की संस्कृति की पहचान पूरी दुनिया मे जाहिर करने वाले कलाकार ही होते है। जब कोई सरकार बड़ा कार्यक्रम कराती है तो कलाकारों का प्रोग्राम करवाती है, उनके मेहनताना के लिए महिनों चक्कर लगवाती है, उनके नाम मात्र के मेहनताना मेंं भी बिना कमीशन के उनका भुगतान नही करती। वहीं जब प्रोग्राम होता है तो सरकार के नुमाइंदे कलाकारों के लिए बड़ी बडी बाते करते है, वह केवल भाषणों तक ही सीमित रह जता हेै, उसको धरातल पर नही उतारते। कल भी कला जागत के लोग आर्थिक तंगी से परेशान थे, आज भी है। कल भी आर्थिक तंगी के कारण दाने दाने को मोहताज रहे है और आज भी है, आर्थिक तंगी के कारण कला के पुजारी मामूली रूप से भी अपना तबियत खराब होने पर उपचार नही करा पाने के कारण परलोक सिधार रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहर फिर मंगलवार को देखने को मिला कि छॉलीवुड की नवोदित अभिनेत्री नेहा साहू आर्थिक तंगी के कारण दाने दाने को मोहताज होने और आर्थिक तंगी के ही कारण ही अपनी मामूली बिमारी पीलिया और पथरी का इलाज सही ढंग से नही करा पाने के कारण दम तोड़ दी। अभी तीन सप्ताह ही हुए है कि देश का सर्वोच्च पुरस्कार पद्मश्री प्राप्त करने वाले राजनांदगांव जिले के ग्राम मोहरा के निवासी गोविंदराम निर्मलकर की पत्नी दुलारी बाई भी आर्थिक तंगी के कारण दाने दाने के लिए मोहताज थी और वह भी अस्वस्थ होने पर आर्थिक तंगी के कारण उचित उपचार नही करा पाने के कारण उनकी भी मौत हो गई थी।
कला और संस्कृति को जीवित रखने वालेे असमय ही मौत के मुंह में समा रहे थे आज भी समा रहे है। केन्द सरकार हो या राज्य सरकार अपनी संस्कृति बचाने वाले और देश विदेश तक पहचान दिलाने वाले कलाकारों को और उनके जीवन को सहेजने में नाकाम साबित हो रही है।
किसी भी देश और राज्य के संस्कृति को बचाये रखने वाले और उस संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने वाले कलाकार ही होते है, जिनके कारण उस देश की और राज्य की संस्कृति की अलग पहचान मिलती है। देश और राज्य के कलाकार वहां के एक प्रकार के धरोहर होते है और केन्द्र और राज्य सरकार अपने धरोहरों को भी नही बचा पा रही है, ये बडे ही शर्म की बात है, यही स्थिति रहेगी तो कोई कला क्षेत्र में नही आयेगा।
छॉलीवुउ अभिनेद्धी नेहा साहू की मौत कई सवाल खड़े करती है। आखिर उसके मौत का जिम्मेदार कौन है? नेहा की इस अकाल मृत्यु का कारण उसकी बीमारी को माना जाए? या लाकडाऊन को जिसकी वजह से काम के आभाव में आर्थिक दिक्कतों के कारण नेहा अपना उचित समय पर सही इलाज नहीं करवा पाई?  नेहा को कोई गंभीर बिमारी नही थी बल्कि पीलिया व पथरी जैसी मामूली समस्या थी जिसका सही समय पर इलाज हो जाता तो शायद आज नेहा अपने सपनों के साथ हमारे बीच होती। कोरोना के चक्कर में  बिना योजना के अचानक पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉकडाउन करने के कारण जहां चार लॉकडाउन में सैकड़ों मजदूरों सडक दुर्घटनाओं, रेल पटिरियों और टे्रनों में जान गंवाने का तथा आर्थिक स्थिति के कारण भूख प्यास से कई लोगों को मरने की खबर आ रही थी। उसमें एक छॉलीवुड के अभिनेत्री का भी नाम शामिल हो गया। कई बड़े और बांग्लादेश जैसे छोटे देश लॉकडाउन लगाने के बाद अपने जनता के खाते में छ: हजार से आठ हजा रूपये तक कई महिने उनके बैंक एकाउंट में डाले ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई न मरे लेकन हमारे देश के केन्द्र सरकार ने इसका कोई इंतजाम नही किया। सरकार की नियत साफ नही है। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम केयर फंड बनाकर उसे सूचना के अधिकार से बाहर रखकर लगभग उसमें 40 हजार करोड रूपये दान मंगवा लिये और मात्र पांच प्रतिशत लोगों जिनके जनधन योजना में खाता था उनको पांच पांच सौ रूपये तीन महिने ही दिये। देश के करीब 1 प्रतिशत जनता जिनको उज्जवला योजना का गैस सिलेंडर मिला था उसको तीन महिनो मु$फत गैस सिलेंण्डर दिये। बाकी लोगों को उनके हाल में मरने के लिए छोड़ दिये। कोई आर्थिक इंतजाम नही किया। इसमें जहां गरीब मजदूरों की हालत तो खराब हुई ही सिने जगत के स्पाट ब्घ्वांॅय,लार्इँटमैंन, और अन्य टेक्निशियन तथा छोटे छोटे कलाकार एवं नवोदित कलाकरों के लिए न ही केन्द्र सरकार ने कुछ की और न ही राज्य सरकारों ने।
 जिनके कारण सिने जगत सहित छॉलीवुड के भी हजारों स्पॉट ब्वॉय से लेकर छोटे कलाकार एवं नवोदिय कलाकारों की हालत एकदम दयनीय हो गई है, वे दाने दाने के मोहतजा हो गये। सरकार सभी दुकाने सहित सभी संस्थानें लगभग खोल दी लेकिन फिल्मों की शूटिंग का परमीशन नही देने से अब अब छत्तीसगढ में छॉलीवुड के लोगों को भी भूखे मरने की स्थिति आ गई  है और कई कलाकार और टेक्रिशियन जिनकी स्वयं की तबियत खराब है या उनके वालों की तबियत खराब है, उनको इलाज के लिए भी पैसे नही होने से समूचित उपचार नही हो पा रहा है और असमय ही मुत्यू का शिकार होने लगे है। इसका ताजा उदाहरण राजनांदगांव में देखने को मिला कि छॉलीवुड की नवोदित अभिनेत्री नेहा साहू पहले तो दाने दाने का मोहताज थी, छत्तीसगढ़ फिल्म प्रोड्युसर एसोसिएशन ने कुछ उनकी उस समय मदद की और बाद में नेहा का तबियत बहुत खराब होने पर उसका रायपुर में कुछ दिनो तक ईलाज कराया लेकिन बाद मे वे उसे राजनांदगांव भेज दिये। इस छॉलीवुड की नवोदित अभिनेत्री नेहा साहू का आर्थिक तंगी के कारण समूचित ईलाज नही मिलने से 2 जून को उसने छॉलीवुड ही नही दुनिया से ही अलबिदा कह दिया।
छत्तीसगढ़ फिल्म प्रोडयूसर एसोसिएशन के योग मिश्रा का नेहा के बारे में अभिमत
नेहा साहू छत्तीसगढ़ी फिल्मों की नवोदित अभिनेत्री कल राजनाँदगाँव के एक अस्पताल में उचित इलाज न मिलने के कारण असमय मौत का शिकार हो गईं। मैं नेहा को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता था। उनका 2 अप्रेल को छत्तीसगढ़ फिल्म प्रोड्युसर एसोसिएशन के पास आर्थिक सहायता के लिए निवेदन आया था। तब मैंने छत्तीसगढ़ प्रोड्यूसर एसोसिएशन की तरफ से उनका हाल चाल लेने फोन पर बात की थी; तब वे बीमार नहीं थी। उन्हें लाकाडाऊन के कारण दैनिक जरूरतों के लिए थोड़ी आर्थिक मदद की जरूरत थी। तब मैंने नेहा से पूछा था कि बेटा राजनाँदगाँव में रहती हो तो लाकडाऊन में घर क्यों नहीं चली गई? तब उसने बताया था कि घर वालों से उसकी बनती नहीं थी क्योंकि घर वालों को उसका सिनेमा में काम करना पसंद नहीं था। बस इतना ही उससे मेरा परिचय हो पाया था।
छत्तीसगढ़ सिने एण्ड टेलिविजन प्रोड्यूसर एसोसिएशन जो करोना काल में अपने जरुरतमंद कलाकारों को मदद करती है उसी क्रम में नेहा की भी जरूरत जान कर मदद कर दी गई थी। उसके बाद लगभग डेढ़ माह बाद अचानक प्रोड्युसर एसोसिएशन के पास नेहा की मेडिकल रिपोर्ट के साथ अस्पताल में भर्ती होने की खबर आती है। साथ ही आर्थिक सहायता के लिए 26 मई को उसके डायरेक्टर, प्रोड्यूसर एसोसिएशन को जानकारी देते हैं। और आनन फानन में एसोसिएशन और एसोसिएशन के अन्य साथी सदस्य व्यक्तिगत तौर पर नेहा की सहायता कर उसके गृहग्राम राजनाँदगाँव उसे रवाना कर देते हैं क्योंकि नेहा के साथ रायपुर अस्पताल में रूकने वाला कोई परिजन मौजूद नहीं होता। नेहा के राजनाँदगाँव जाने के एक सप्ताह बाद यह खबर आ जाती है कि नेहा नहीं रही!
अब सवाल यह उठता है कि नेहा की इस अकाल मृत्यु का कारण उसकी बीमारी को माना जाए? या लाकडाऊन को जिसकी वजह से काम के आभाव में आर्थिक दिक्कतों के कारण नेहा अपना उचित समय पर सही इलाज नहीं करवा पाई? क्योंकि नेहा को पीलिया व पथरी जैसी मामूली समस्या थी जिसका सही समय पर इलाज हो जाता तो शायद आज नेहा अपने सपनों के साथ हमारे बीच होती।
लॉकडाउन के कारण मरे होंगे कितने नेहाओं के सपने
इस लाकडाऊन में न जानें कितनी नेहाओं के सपने मरे होंगे। अंदाज लगाना भी मुश्किल है। जाने कितने कलाकार होंगे जो लगातार हो रही इस तालाबंदी के कारण शूटिंग और स्टेज प्रोग्राम के आभाव में आर्थिक समस्याओं से रोज गुजर रहे होँगे? हमारे जैसे एसोसिएशनों की भी लोगों को मदद करने के साधन सीमित हैं। जिससे जितना बन पड़ रहा है लोग, लोगों की मदद कर रहे हैं। हम लोग भी अपने छत्तीसगढ़ी फिल्मों के कलाकारों और टेक्निशियनों की मदद कर रहे हैं पर यह सब राहत ऊँट के मुँह में जीरा’ है कुछ दिन की राहत जितनी हैं;। बार-बार मदद लेने में लोग संकोच भी कर जाते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार यदि अब भी कलाकारो को इस आर्थिक बदहाली से निकालने कोई ठोस नीति नहीं बनाती है तो सच मानिए कोरोना से कलाकार न भी मरें; तो अपनी आर्थिक दिक्कतों से जरूर मारे जाएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here