सप्रे शाला व दानी स्कूल मैदान में जारी निर्माण पर रोक लगाने की मांग, एक प्रतिनिधि मंडल ने नगरीय प्रशासन मंत्री से की मुलाकात, सौंपा ज्ञापन

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रायपुर। राजधानी के सप्रे शाला मैदान व दानी स्कूल मैदान में निगम द्वारा कराए जा रहे कार्यो को लेकर विरोध के स्वर लगातार बढ़ रहे। एक तरफ बीजेपी इस मामले में नगर निगम व महापौर एजाज ढेबर के खिलाफ हमलावर है तो दूसरी तरफ अब कई सामाजिक व खेल संगठनों ने भी इस निर्माण कार्य के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर का दावा है कि निगम द्वारा यहां कर्मिशियल उपयोग के लिए निर्माण नहीं किया जाएगा तो दूसरी तरफ बीजेपी द्वारा शहर के सबसे पुराने स्कूलों की धरोहर को खत्म कर व्यावसायिक उपयोग करने का आरोप लगा रही है। वहीं अब कई संगठनों ने भी निगम पर कर्मिशियल उपयोग करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को सामाजिक संगठनों का एक प्रतिनिधि मंडल नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया से मुलाकात कर वहां निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। डॉ अजीत आनंद डेगवेकर, माकपा नेता धर्मराज महापात्र, विश्वजीत मित्रा, निश्चय बाजपेयी, दीपक शर्मा, राजू कदम, शाहिद मोहम्मद समेत अन्य लोगों ने मंगलवार को नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया को ज्ञापन सौंप कर बताया है कि हम रायपुर शहर के नागरी समाज, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल के कायकर्ताओं की ओर से रायपुर के हृदय स्थल ऐतिहासिक सप्रे शाला खेल मैदान तथा जेआर दानी कन्या शाला के मैदान को काटकर अन्य प्रयोजनों के लिए चल रहे निर्माण कार्य की ओर ध्यान आकर्षित कर इस पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह करते है। नगरीय प्रशासन मंत्री को प्रतिनिधि मंडल ने अवगत कराया कि माधव राव सप्रे स्वतंत्रता सेनानी के नाम से यहां संचालित स्कूल व यह मैदान आजादी के आंदोलन के साथ ही खेल के मैदान और अनेक महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तनों का केंद्र रहा है। यहां से निकले विद्यार्थियों में अनेक लोग शामिल हंै, साथ ही इस खेल मैदान ने सीमित सुविधाओं के बावजूद प्रदेश को अनेक उच्च स्तरीय खिलाड़ी भी दिये है। कुछ समय पहले ही विगत सरकार के कार्यकाल में इस मैदान को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर छोटा कर दिया गया था। इसके लिए कर्मचारी भवन की भी बलि चढ़ा दी गई थी। 2 करोड़ रुपए खर्च कर इसे पुनर्निमित किया गया। ठीक इसी तरह जेआर दानी स्कूल व डिग्री गल्र्स कॉलेज भी इससे लगा हुआ है। सड़क निर्माण के लिए इसे भी पहले ही छोटा कर दिया गया और अब इसके मैदान को और काटकर छोटार किया जा रहा है। ये जमीने सरकार को दान में मिली थी जिसका प्रयोजन भी स्पष्ट था। पिछले सरकार के कार्यकाल में भी बूढ़ा तालाब के सौदर्यीकर्ण व वहां चौपाटी निर्माण के लिए इन मैदानों पर हमले का प्रयास हुआ, किन्तु नागरिकों के भरी विरोध तथा हमारे बच्चियों के आवागमन के मार्ग में ऐसे पहल से उनकी असुरक्षा के मद्देनजर उस सरकार को यह निर्णय वापस लेना पड़ा। वर्तमान में नगर निगम, स्मार्ट सिटी परियोजना कि ओर से बूढ़ा तालाब सफाई के नाम पर इन मैदानों को काटकर निर्माण कार्य चलाया जा रहा है जो पूरी तरह से अनुचित है।
यह अपराधिक कृत्य है- प्रतिनिधि मंडल ने नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया से सवाल किया है कि दानदाताओं से उनके जमीन का किस प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा रहा है उन्हें बताया गया और उनसे सहमति या विश्वास में लिया गया है या नहीं? रायपुर शहर ऐसे ही खेल मैदानों की कमी से जूझ रहा है। यहां आसपास के नागरिक इस मैदान का पैदल चलने, खिलाड़ी अपना अभ्यास करने के लिए उपयोग करते हैं। इसे सुरक्षित करने कि बजाय पेड़ पौधो को काटकर मौजूदा मैदान को खत्म कर उसे व्यावसायिक प्रयोजन के लिए उपयोग में लाना इस शहर के नागरिकों के साथ न केवल अमानवीय है, बल्कि आपराधिक कृत्य है जिसकी तीखी आलोचना व विरोध करते है।
रातों रात निर्माण कार्य क्यों: प्रतिनिधि मंडल ने महापौर व नगर निगम के कामकाज को लेकर भी सवाल खड़े किए है। उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री से कहा है कि ऐसे समय जब पूरा प्रदेश कोरोना महामारी से निपटने के लिए तालाबंदी के नियमों व अमूल्य मानव जीवन को बचाने के कार्य में जुटा है। तब रात के अंधेरे व पुलिसिया साये में यह निर्माण कार्य संदेह व इसके पीछे दूसरे किस्म के बड़े खेल की आशंका को जन्म देता है। दोनों स्कूल की मैदान को सुरक्षित रखने और इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ छेड़छाड़ के प्रयासों और वहां चल रहे निर्माण कार्यो पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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