आर्थिक निर्भरता व स्वदेशी अपनाने का जोर स्वागत योग्य, क्या चीन पर प्रतिबंध लगाने संसद में विधेयक/बिल लाना आवश्यक नहीं- जेठानी

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रायपुर। 12 मई की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस को लेकर देश के नाम एक संदेश दिया गया जिसमें उन्होंने स्थानीय उत्पादनों को अपनाने एवं भारत में ही उत्पादन करने प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। इस पर राजधानी रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोहर जेठानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा आर्थिक निर्भरता व स्वदेशी अपनाने पर जोर देना स्वागत योग्य है, लेकिन उन्होंने यह भी सवाल उठाए है कि क्या चीन पर प्रतिबंध लगाने संसद में विधेयक/बिल लाना आवश्यक नहीं है। इस पर उन्होंने अपना विचार व्यक्त करते हुए कुछ सुझाव भी देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम भूपेश बघेल और रायपुर कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन को पत्र लिखा है। उन्होंने पीएम को लिखे पत्र में अपना विचार व सुझाव व्यक्त करते हुए लिखा है कि आज संपूर्ण भारत देश करोना नामक गंभीर एवं जानलेवा संक्रामक रोग से पीडि़त एवं भयभीत है। जहां पर हर पल मौत का भय इंसानों के मध्य कायम है। इस संक्रामक रोग की उत्पत्ति का प्रमुख आधार एवं शुरुवाती श्रोत चीन से हुई है एवं चीन पर यह भी आरोप लगाए गए है कि वह चाहता तो कोरोना के फैलाव पर प्रारंभिक रूप से ही उसके फैलाव पर रोक लगा सकता था एवं उसकी सूचना विभिन्न देशों को प्रदान करने पर लाखों व्यक्तियों की हुई मौत एवं अरबों-खरबों रुपयों की आर्थिक बर्बादी पर नियंत्रण पाया जा सकता था। परंतु चीन की मंशा पाक-साफ नहीं होने की अवस्था में भारत एवं अन्य देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है जिसके कारण संपूर्ण अर्थ व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। जबकि भारत देश के हजारों एवं लाखों व्यक्ति चीन एवं अन्य विदेशों की चका-चौंध से प्रभावित एवं मोहित होकर अपने वतन भारत देश को छोड़कर विदेश में जाकर वहां व्यावसायिक कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है जिसके कारण कई व्यक्तियों द्वारा वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर ली है एवं वहां के उत्पादनों को भारत भिजवा कर आर्थिक लाभ की प्राप्ति करते हैं जिसके कारण उन्हें देखकर अन्य भारतीयों को भी विदेशों में जाकर नौकरी करने अथवा व्यावसायिक कार्यों में भाग लेने के लिए मार्ग दर्शन प्राप्त होता है। 12 मई प्रधानमंत्री द्वारा दिये गए वक्तव्य में उन्होंने स्थानीय उत्पादनों को अपनाने एवं भारत में ही उत्पादन करने तथा इस संबंध में प्रोत्साहित करने जोर दिया गया है जो कि दिल से स्वागत योग्य है। परंतु केवल बातों के माध्यम से एवं समझाइश दिये जाने के आधार पर क्या भारत के लोगों को पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना पर्याप्त होगा, क्या यह आवश्यक नहीं होगा कि चीन एवं अन्य विदेशों के माध्यम सेे संव्यवहार किए जाने एवं उस पर निर्भर होने को निषेधित किए जाने हेते पक्ष विपक्ष एक मत होकर संसद में विधेयक/बिल के माध्यम सेे कठोर कानून को बनाया जाए एवं उसका कठोरतापूर्वक पालन कराया जाए। ऐसा होता है तो यकीनन चीन के माध्यम से भारत में किए जाने वाले व्यापार को आसानीपूर्वक प्रतिबंध किया जा सकता है। इसके लिए क्या उचित नहीं होगा कि मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ सभी कलेक्टरों द्वारा भी उक्त कार्यवाहियों को अथवा अन्य वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अग्रसर हो अर्थात एक मत होकर उक्त कार्यवाहियों बाबत विधेयक/बिल को जारी करवाने के लिए अनुशंसा किए जाने पर निश्चित ही उचित लक्ष्य की प्राप्ति किया जा सकता है। ऐसा संभव होने पर इस बात की भी प्रबल संभावनाएं है कि भारत देश अथवा अन्य देश उक्त प्रणाली पर विचार कर कार्यवाहियां करता है तो चीन की अर्थव्यवस्था भी व्यापक रूप से प्रभावित होगी जिसके कारण भी चीन के मन में भय का वातावरण कायम रहेगा?

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