वापसी के नाम पर प्रदेश सरकार ग़रीब मज़दूरों के साथ ओछे हथकंडों पर उतरी : भाजपा

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0 शर्मा का सवाल : कोरोना की रोकथाम और प्रभावितों की मदद में खर्च की गई राशि का हिसाब कौन देगा?

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश प्रवक्ता और विधायक शिवरतन शर्मा ने कोरोना संकट के इस भयावह दौर में भी विभिन्न प्रदेशों से वापसी के लिए ग़रीब मज़दूरों के साथ ओछे राजनीतिक हथकंडे इस्तेमाल करने पर प्रदेश सरकार की कड़ी निंदा की है। श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों की वापसी के नाम पर प्रदेश सरकार का राजनीतिक पाखंड एक बार फिर ज़ाहिर हो गया है। इससे यह भी स्प्ष्ट हो गया कि प्रदेश सरकार कोरोना की रोकथाम विभिन्न राज्यों में फँसे प्रदेश के श्रमिकों की वापसी के नाम पर कोई ठोस काम करने के बजाय सिर्फ टाइम पास करने में लगी है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व विधायक श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार के अनुसार 1.60 लाख श्रमिक लॉकडाउन के चलते विभिन्न प्रदेशों में फँसे हुए हैं जबकि मजदूरों का यह आंकड़ा 3 लाख से भी अधिक है जिनकी वापसी के नाम पर प्रदेश सरकार ने केंद्र से श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की है। लेकिन इन रेलगाड़ियों संख्या श्रमिकों की संख्या के मान से काफी कम है। रेल मंत्रालय की एडवाइजरी के मुताबिक एक ट्रेन में लगभग 12सौ श्रमिक ही लौट पाएंगे। इस तरह तो प्रदेश के श्रमिकों की वापसी में कितना समय खर्च हो जाएगा, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।भाजपा मांग करती है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने कितनी ट्रेनों की मांग की है ? । श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह रवैया साफ करता है कि कोरोना की रोकथाम और प्रभावितों की सहायता के नाम पर केवल जुबानी जमाखर्च ही करके समय बिताने और झूठी वाहवाही बटोरने का शर्मनाक उपक्रम कर रही है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व विधायक श्री शर्मा ने कटाक्ष किया कि पीएम केयर्स का हिसाब मांगने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा राशि बताकर पारदर्शिता के नाम पर अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू तो बन रहे हैं लेकिन उसमें कोरोना की रोकथाम और प्रभावितों की मदद में खर्च की गई राशि का हिसाब कौन देगा? मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा हुए 56 करोड़ रुपयों में अब तक प्रदेश सरकार ने सिर्फ 10 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं। कोरोना से जारी जंग का सारा खर्च तो केंद्र सरकार ही वहन कर रही है, उसमें प्रदेश सरकार का योगदान तो शून्य ही है। प्रदेश सरकार अपने खजाने और मुख्यमंत्री सहायता कोष की राशि खर्च करने में क्यों कोताही बरत रही है? श्री शर्मा ने कहा कि जो मज़दूर अब विभिन्न प्रदेशों से वापस छत्तीसगढ़ लौटे हैं, वे अब अन्य प्रदेशों में आजीविका के लिए जाने को तैयार नहीं हैं। अत: प्रदेश सरकार को अब उनके रोज़गार व अन्य जरूरतों के लिए स्थायी व्यवस्था की कार्ययोजना भी बनाने का काम शुरू कर देना चाहिए।

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