मोदी ने फिर किसानों को ठगा, समर्थन मूल्य महंगाई से भी कम बढ़ा- चौबे, अभूतपूर्व संकट पर पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि, किसानों से भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा माफी मांगने की मांग

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रायपुर। इस बार की ठगी पिछले पांच सालों की सबसे बड़ी ठगी है। धान का समर्थन मूल्य पिछले पांच वर्षों में सबसे कम बढ़ाया गया है। धान का समर्थन मूल्य वैसे तो 53 रुपए बढ़ाया गया है, लेकिन प्रतिशत में देखें तो पिछले साल की तुलना में समर्थन मूल्य सिर्फ 2.92 प्रतिशत बढ़ा है। उक्त बातें प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने मंगलवार की दोपहर राजीव भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने कल चार कथाकतिथ बड़ी घोषणाएं की हैंद्व लेकिन चारों में झूठ और ठगी छिपी हुई है। पहले तो समर्थन मूल्य में न्यूनतम बढ़ोत्तरी करते हुए यह कहना कि किसान को लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिल रहा है। दरअसल सरकार ने लागत का आंकलन ही गलत किया है। जिन 14 फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया है उनमें दो को छोड़कर सब पांच प्रतिशत या उससे से कम हैं। धान और अन्य फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि तो बाजार में बढ़ी महंगाई की दर से भी कम है। दूसरी घोषणा यह है कि किसानों को 7 प्रतिशत की दर पर कर्ज दिया जाएगा। सच यह है कि यह पुरानी योजना है। तीसरी घोषणा समय पर कर्ज चुकाने पर तीन प्रतिशत सब्सिडी देने की है। इसका सच भी यह है कि यह छूट पहले से मिलती आ रही है। चौथी घोषणा यह है कि किसानों के लिए ब्याज में छूट 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। सच यह है कि किसानों को ब्याज से छूट नहीं है बल्कि पटाने के समय में छूट मिली है। ऐसे समय में जब किसान दबाव और तनाव में है मोदी सरकार ने किसानों का भला करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
केंंद्र सरकार मूल्य का गलत आंकलन कर रही: प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने यह भी कहा कि 20 जून 2018 को नमो ऐप पर किसानों से बातचीत करते हुए खुद पीएम मोदी ने ‘लागत+50 प्रतिशतÓ का आंकलन ‘2Ó के आधार पर देने का वादा किया था। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि फसल की लागत मूल्य में किसान के मजदूरी व परिश्रम, बीज, खाद, मशीन, सिंचाई और जमीन का किराया आदि शामिल किया जाएगा। लेकिन लागत का आकलन करते हुए इस फ ॉर्मूले को दरकिनार कर दिया गया। केंद्र सरकार कह रही है कि धान की प्रति क्विंटल लागत 1245 रुपए है. अगर इसमें सारे खर्च जोड़ दिए जाएं तो किसी भी सूरत में धान की लागत इससे बहुत अधिक पड़ती है। यानी मोदी जी का किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आज फिर से जुमला बन गया।
यूपीए बनाम एनडीए की तुलना: उन्होंने यूपीए सरकार और एनडीए सरकार की तुलना करते हुए कहा कि भाजपा की अटल बिहारी बाजपेई सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 6 वर्षो में 490 से 550 रूपए किया था। यानी मात्र 60 रू. की वृद्धि की थी। अब मोदी सरकार ने शुरुआत के चार वर्षो में मात्र 200 की वृद्धि की थी। 18-19 में चुनावी साल था तो उस साल 200 रूपए की वृद्धि हुई और चुनाव खत्म होते ही वृद्धि 85 रूपए पर सिमट गई। इस वर्ष सिर्फ 53 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि। जबकि कांग्रेस ने 10 वर्षो में समर्थन मूल्य में 890 रूपए की वृद्धि की। यूपीए-1 में धान का समर्थन मूल्य 5 वर्षों में 2004 से 2009 तक 450 रुपए बढ़ाया गया और धान का मूल्य 550 रुपए प्रति क्ंिवटल से 900 प्रति क्ंिवटल हो गया। 09 से 14 तक 5 वर्षों में धान का समर्थन मूल्य 440 रुपए बढ़ाया गया।
किसानों के साथ षडय़ंत्र रच रही सरकार: मोदी सरकार पर किसानों के साथ षडय़ंत्र रचने का आरोप लगाते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार एक और षडयंत्र रच रही है। किसानों को मिलने वाली सारी सब्सिडी को खत् करके उसे नकद के रूप में किसानों के खातों में डाल दिया जा रहा है। यह किसानों को ठगने का एक और षडय़ंत्र है। सब्सिडी की राशि आज के मूल्य पर गिनकर खातों में डाल दी जाएगी और किसानों को बाजार मूल्य पर खाद आदि खरीदने को कहा जाएगा। बाजार की कीमतें बढ़ती जाएंगी और सब्सिडी स्थिर रहेगी।
हिम्मत है तो उद्योगों मेंं भी लागू करें सरकार: मोदी सरकार पर हमलावर होते हुए चौबे ने कहा कि अगर मोदी सरकार में हिम्मत है तो किसानों के लिए यह योजना लागू करने के साथ उद्योगों में भी लागू करें कम से कम अपने चहेते उद्योगपतियों पर लागू करे और उन उद्योगों से कहा जाए कि जमीन, बिजली, पानी और टैक्स की छूट खत्म करके नकद दे देंगे और वे भुगतान बाजार दर पर करें। क्या उद्योग ऐसा कर पायेंगे? अगर उद्योग ऐसा नहीं क सकते तो किसानों के साथ सब्सिडी का यह षडय़ंत्र क्यों?
पत्रकारवार्ता में ये भी रहे शामिल: अभी लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं है भाजपा का चाल चरित्र चेहरा है कि किसानों को लगातार धोखा, छल करने का काम करती है। इसीलिये अभी 53 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर किसानों के साथ छल कर रही है। पत्रकारवार्ता में विधायक बृहस्पति सिंह, वरिष्ठ नेता राजेन्द्र तिवारी, पूर्व विधायक एवं संचार विभाग सदस्य रमेश वल्यानी, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतिमा चंद्राकर, प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, विकास तिवारी, एमए इकबाल, सुरेन्द्र वर्मा, मीडिया समन्वयक अजय गंगवानी, प्रकाशमणि वैष्णव, स्वपनिल मिश्रा उपस्थित थे।

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