अंधेर नगरी, चौपट राजा रायगढ़ निगम में नियमों का मखौल चहेते ठेकेदारों पर कृपा और प्रशासनिक आतंकवाद की तैयारी

केनाल लिंक रोड निर्माण में धारा 291 को किया बाईपास कांग्रेसी पार्षदों का तीखा विरोध, मानसून से पहले प्रगति नगर जैसी बर्बरता दोहराने की आशंका

रायगढ़। नगर पालिक निगम रायगढ़ में इन दिनों अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर कामकाज चल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर प्रक्रियाओं को बाईपास करते हुए चहेतों को उपकृत करने का एक बड़ा खेल सामने आया है। मामला केवड़ाबाडी चौक से मरीन ड्राइव तक केनाल लिंक रोड निर्माण कार्य का है जिसे लेकर नगर पालिक निगम प्रशासन ने सीधे निविदा दर निर्धारण हेतु प्रस्ताव परिषद की बैठक में ला दिया। इस तानाशाही रवैये के खिलाफ कांग्रेसी पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है और परिषद की बैठक में इस संदिग्ध प्रस्ताव का जमकर और खुलकर विरोध किया।

कांग्रेसी पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस पूरी कार्ययोजना में नगर पालिक निगम की धारा 291 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना किसी पूर्व स्वीकृति, बिना किसी सर्वे और बिना पुनर्वास की ठोस नीति के सीधे टेंडर की दर स्वीकृति के लिए लाया गया यह प्रस्ताव पूरी तरह फर्जी और नियमों के विपरीत है।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस केनाल लिंक रोड के दायरे में कितने घर आएंगे, कितने भू-स्वामी हक के हैं, कितने लोग नजूल भूमि पर सालों से काबिज हैं, उन्हें क्या मुआवजा दिया जाएगा साथ ही कहां और कैसे पुनर्वास किया जाएगा। इस संबंध में परिषद में न कोई प्रस्ताव लाया गया है और न कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पुल से सटे जो दुकानदार वर्षों से वहां व्यवसाय कर रहे हैं, उनके पुनर्वास की भी कोई व्यवस्था या आश्वासन जिला प्रशासन या निगम प्रशासन ने नहीं दिया गया है और चुप्पी साध ली है। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेसी पार्षदों ने आशंका जताते हुए कहा कि निगम प्रशासन की मंशा ठीक वैसी ही है जैसी प्रगति नगर में दिखी थी जहां प्रशासनिक आतंकवाद और खौफ के साए में गरीबों के आशियाने को बेरहमी, असंवेदनहीनता और बर्बरतापूर्वक तोड़ा गया था। विपक्ष को पूरी शंका है कि यहां भी मानसून के मुहाने पर गरीबों के साथ इसी तरह का अन्याय करते हुए उन्हें बलपूर्वक हटाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने साफ लफ्जों में कहा इस मामले में कांग्रेस प्रभावितों के साथ ढाल बनकर खड़ी रहेगी और उन्हें प्रशासनिक आतंक के खौफ से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएगी।

नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने वैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि नगरीय निकाय क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व धारा 291 का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसका यहां सरेआम मखौल उड़ाया गया है। धारा 291नियम के तहत किसी भी कार्ययोजना के पूर्व मांग दिनांक से 6 माह के भीतर निर्माण योजना बनाना अनिवार्य है। योजना बनने के बाद आयुक्त को सार्वजनिक सूचना देकर 30 दिनों से कम का समय नहीं देते हुए आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित करने होते हैं।
प्राप्त आपत्तियों पर आयुक्त को 15 दिनों के भीतर अपने मत सहित इसे मेयर इन काउंसिल को भेजना होता है। एमआईसी इसे 15 दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी के साथ परिषद को प्रेषित करती है, जहां इस पर विचार कर योजना को संशोधित या स्वीकृत कर शासन को भेजा जाता है। यदि निगम ऐसा नहीं करता तो शासन खुद योजना बनाकर दावे-आपत्तियां मंगाता है। लेकिन रायगढ़ निगम प्रशासन ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह बाईपास कर दिया। न तो प्रभावित परिवारों का कोई सर्वे हुआ, न मुआवजे की दर तय हुई और न ही कोई आम सूचना जारी की गई है।

नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया द्वारा केवड़ा बस स्टैंड चौक से मरीन ड्राइव तक लिंक रोड की शासकीय नस्ती फ़ाइल का बारीकी से अवलोकन करने पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नस्ती के अवलोकन के पश्चात उसमें परिषद संकल्प के प्रस्ताव की कॉपी ही नहीं पाई गई। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि एमआईसी और परिषद को पूरी तरह बाईपास करके बिना परिषद संकल्प के इसे सीधे शासन से स्वीकृत कराया गया। विपक्ष का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव बिना परिषद के संकल्प के शासन से स्वीकृत कराया गया था तो इसकी दर भी शासन से ही स्वीकृत करानी थी इसे परिषद में लाने की आवश्यकता ही क्या थी?

कांग्रेसी पार्षदों ने खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि यह प्रस्ताव एमआईसी या परिषद की पूर्व स्वीकृति से पास हुआ है, तो नगर निगम कार्यपालन अधिकारी, महापौर, एमआईसी और प्रतिपक्ष के पार्षदों को उस प्रस्ताव के संकल्प की प्रति उपलब्ध कराएं और महापौर तारीख घोषित करें कि किस दिनांक को एमआईसी ने इसे परिषद हेतु प्रेषित किया था। और यदि ऐसा नहीं है तो इस प्रस्ताव को कार्यपालन अभियंता तत्काल निरस्त करें। नगर निगम के चुनाव के बाद से ही प्रदेश के दो कथित ठेकेदारों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखी है । निविदा प्रथम हो द्वितीय हो या तृतीय हो कार्य इन दो चहेते ठेकेदारों को ही दिया जा रहा हैं नगर निगम अंधेर नगरी चौपट राज की तर्ज पर कार्य कर रही है। यह प्रस्ताव अपने आप में नगर निगम अधिनियम के विरुद्ध है इस प्रस्ताव को कार्यपालन अधिकारी को जांच कर निरस्त करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि नगर पालिक निगम रायगढ़ में पूरी तरह नियम विरुद्ध काम हो रहा है।

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेसी पार्षदों ने लिखित में अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत खेद का विषय है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने की हड़बड़ाहट में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विस्थापन एवं पुनर्वास को पूर्णतः नजरअंदाज कर दिया है। चूंकि मानसून नजदीक है। ऐसे में बिना ठोस योजना के लोगों को उजाड़ना निगम की घोर संवेदनहीनता और वंचित वर्ग के शोषण को दर्शाता है। इस पूरे प्रकरण को प्रदेश के मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री से भी शिकायत कर नगर पालिक निगम रायगढ़ की नियम विरुद्ध कार्य प्रणाली के संबंध में अवगत कराया जाएगा।

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