ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, बातचीत का रास्ता खुला; अस्वीकार होने पर ‘निर्णायक जंग’ की चेतावनी

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच बातचीत की एक नई कोशिश सामने आई है। ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा वार्ता शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक ये शर्तें कतर के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाई गई हैं और अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

तीन प्रमुख शर्तों की जानकारी सामने आई

मोहसिन रेजाई ने जिन शर्तों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया है, उनमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के रोके गए फंड जारी करना और समुद्री नाकेबंदी खत्म करना शामिल हैं। सातों शर्तों का पूरा आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ईरान का कहना है कि कतर मध्यस्थ के तौर पर दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए हुए है। पाकिस्तान भी बातचीत को दोबारा शुरू कराने की कोशिशों में शामिल रहा है।

ईरान ने कहा- निर्णायक जंग के लिए तैयार

रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसकी शर्तें स्वीकार नहीं की जाती हैं तो ईरान “निर्णायक जंग” के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी धमकियों से तेहरान की स्थिति नहीं बदलेगी।

इस तरह ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखने का संदेश दिया गया है, वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में कड़ा जवाब देने की बात कही गई है।

कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया संदेश

ईरान के सुरक्षा प्रमुख के अनुसार, कतर ने तेहरान की शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचा दी हैं। अब ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पहले हुए अंतरिम समझौते को लेकर भी मतभेद बने हुए हैं। चीन ने हाल ही में दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अपील की थी।

आगे क्या होगा, ट्रंप के जवाब पर नजर

अब निगाह अमेरिकी प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है। यदि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत होते हैं तो बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं, असहमति की स्थिति में सैन्य टकराव जारी रहने या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

फिलहाल ईरान ने अपनी सात शर्तों की घोषणा तो की है, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में उनमें से केवल कुछ प्रमुख मांगों का ही स्पष्ट विवरण सामने आया है।

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