कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए PCPNDT अधिनियम सख्ती से लागू हो : सुप्रीम कोर्ट

लिंग परीक्षण पर जताई चिंता, कहा- बेटियों के जीवन के अधिकार की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग परीक्षण के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) अधिनियम का देशभर में सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रूण के लिंग का पता लगाकर कन्या भ्रूण हत्या करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बेटियों के जीवन के अधिकार पर भी सीधा हमला है।


कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर

सुप्रीम Court ने कहा कि PCPNDT अधिनियम का उद्देश्य केवल लिंग परीक्षण पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता को समाप्त करना भी है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतर्क रहने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


लिंगानुपात सुधारने के लिए जरूरी है सख्ती

अदालत ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएं समाज में लैंगिक असंतुलन को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में बेटियों के जन्म और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का सख्ती से पालन किया जाना बेहद आवश्यक है।


समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि केवल सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज के सभी वर्गों को बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने होंगे।


क्या है PCPNDT अधिनियम?

PCPNDT अधिनियम वर्ष 1994 में लागू किया गया था। इस कानून के तहत भ्रूण के लिंग निर्धारण और लिंग चयन पर प्रतिबंध है। साथ ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों और अन्य संबंधित संस्थानों के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और कारावास तक का प्रावधान है।


बेटियों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेटियों को जन्म लेने से पहले ही जीवन से वंचित करने की मानसिकता को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। अदालत ने दोहराया कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए PCPNDT अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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