कन्या विवाह योजना में मंगलसूत्र विवाद पर विभाग की सफाई, चांदी अनिवार्य नहीं, गिलेट का मंगलसूत्र ही तय मानक

दुल्हनों के आरोपों के बाद प्रशासन ने जारी किया स्पष्टीकरण, नियमों के अनुसार हुई खरीद

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मनेंद्रगढ़। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित मंगलसूत्र को लेकर उठे विवाद के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। विभाग ने कहा है कि योजना के दिशा-निर्देशों में चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं है, बल्कि निर्धारित प्रावधानों के तहत गिलेट (इमिटेशन) मंगलसूत्र की खरीदी की गई थी।


दुल्हनों ने उठाए थे गुणवत्ता पर सवाल

हाल ही में सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल कुछ नवविवाहित महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें चांदी के नाम पर गिलेट का मंगलसूत्र दिया गया। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया और योजना में वितरित सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।


विभाग ने बताया क्या है नियम

विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवदंपतियों को दी जाने वाली सामग्री के लिए निर्धारित बजट और मानक तय हैं। योजना के नियमों में चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं है। इसी आधार पर स्वीकृत प्रक्रिया के तहत गिलेट मंगलसूत्र की खरीदी और वितरण किया गया।


जांच के बाद जारी किया गया स्पष्टीकरण

मामले के तूल पकड़ने के बाद संबंधित अधिकारियों ने रिकॉर्ड और खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की। विभाग का कहना है कि सामग्री की आपूर्ति निर्धारित स्वीकृत मानकों के अनुरूप की गई है और नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है।


योजना को लेकर भ्रम दूर करने की कोशिश

अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में चांदी का मंगलसूत्र दिए जाने की बात कही जा रही थी, जबकि योजना के आधिकारिक प्रावधानों में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है। इसलिए लोगों को तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता प्रदान करना है। योजना के तहत विवाह समारोह के साथ नवदंपतियों को आवश्यक घरेलू सामग्री और उपहार भी उपलब्ध कराए जाते हैं।


विवाद के बीच प्रशासन की नजर

विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार की जाती हैं। यदि किसी स्तर पर अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच भी कराई जाएगी। फिलहाल विभाग ने मंगलसूत्र विवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि गिलेट का मंगलसूत्र ही स्वीकृत मानकों के अनुरूप वितरित किया गया था।

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