कुसमुंडा में ठेका मजदूर महासभा का ऐतिहासिक शंखनाद : पारित हुए 3 बड़े प्रस्ताव, बिलासपुर SECL मुख्यालय के घेराव का ऐलान

छत्तीसगढ़ के ऊर्जा धानी कोरबा और रायगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत एसईसीएल (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में कोयला खदानों के ठेका श्रमिकों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हुंकार भर दी है। राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के वरिष्ठ श्रमिक नेता प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर शुक्रवार 12 जून 2026 को कुसमुंडा के महतारी अंगना (कबीर चौक) में ‘ऐतिहासिक ठेका मजदूर महासभा’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस महासम्मेलन में भारी संख्या में खदानों के ठेका मजदूरों और विभिन्न श्रमिक संगठनों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का शंखनाद किया और ‘कुसमुंडा घोषणा-पत्र’ जारी कर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।

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श्रमिकों की रीढ़ पर टिका है कोयला उद्योग, पर मिल रहा सिर्फ शोषण

महासभा के मुख्य मंच पर प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे, मोहम्मद नासिर खान, भावेन्द्र तिवारी, UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, CKS (गैर-राजनीतिक संगठन) के अतुल दास महंत, उमा गोपाल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से गणेश सिंह ऊईके और प्रखर समाजसेवी नेत्री अनुसुईया राठौर सहित कई दिग्गज श्रमिक नेता उपस्थित रहे।

मंच से वक्ताओं ने ठेका मजदूरों की दयनीय स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोयला खदानों की सबसे जोखिमभरी और अनिवार्य मुख्य गतिविधियों (Core Activities) जैसे— हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) संचालन, ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, डम्पर ड्राइविंग, रूफ बोल्टिंग और कोयला उत्खनन में रात-दिन अपनी जान जोखिम में डालकर खटने वाले ठेका मजदूर ही इस पूरे उद्योग के असली इंजन और रीढ़ हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रधान नियोक्ता द्वारा उनके जायज हक, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से वंचित रखा जा रहा है।

महासभा में सर्वसम्मति से पारित हुए तीन ऐतिहासिक विधिक प्रस्ताव

कोयलांचल के मजदूरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए महासभा में सर्वसम्मति से तीन बड़े विधिक प्रस्ताव पारित किए गए:

  1. प्रस्ताव क्रमांक 1 (नियमितीकरण और धारा 57 का क्रियान्वयन): केंद्र सरकार के नए ओ.एस.एच.डब्ल्यू. कोड (OSHWC), 2020 की धारा 57 का कड़ाई से हवाला देते हुए मांग की गई कि खदानों के मुख्य (Core) कार्यों में ठेका प्रथा को तत्काल और पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। दशकों से एमडीओ (MDO) और ईपीसी (EPC) मॉडल के तहत काम कर रहे अनुभवी ठेका श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से SECL के नियमित रोल पर लिया जाए।
  2. प्रस्ताव क्रमांक 2 (श्रम कानूनों में विधिक संशोधन): पूर्ववर्ती कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 के नियम 25(2)(v)(a) के तहत “समान कार्य के लिए समान वेतन” और ठेका प्रथा के क्रमिक उन्मूलन के जो स्पष्ट विधिक अधिकार मजदूरों को प्राप्त थे, उन्हें नए ओएसएचडब्ल्यू कोड 2020 में भी अक्षरसः जोड़ने हेतु केंद्र सरकार से तुरंत आवश्यक संशोधन की मांग उठाई गई।
  3. प्रस्ताव क्रमांक 3 (NCWA-IV की कण्डिका 11.5.1 का परिपालन): एसईसीएल प्रबंधन को सचेत किया गया कि नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट (NCWA) की कण्डिका 11.5.1 के तहत प्रबंधन स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेका मजदूर न लगाने के लिए विधिक रूप से बाध्य है। अतः इन प्रावधानों के तहत सभी ठेका कर्मियों को सीधे मुख्य नियोक्ता के अधीन समायोजित किया जाए।

“स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार”: जारी हुआ ऐतिहासिक कुसमुंडा घोषणा-पत्र

महासभा में सर्वसम्मति से बहुप्रतीक्षित ‘कुसमुंडा घोषणा-पत्र’ को हरी झंडी दी गई। इस घोषणा-पत्र में “स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार” और “समान कार्य, समान वेतन, समान सम्मान” के मूल सिद्धांतों को बुलंद किया गया है। घोषणा-पत्र के माध्यम से प्रबंधन से पुरजोर मांग की गई है कि खदानों में कार्यरत प्रत्येक ठेका श्रमिक को वैधानिक नियुक्ति पत्र, मासिक वेतन पर्ची (Pay Slip), रोजगार पहचान पत्र (EPF/ESIC), आवास, सुरक्षित पेयजल और निःशुल्क उन्नत चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए।

जून से अगस्त तक डेटा संग्रह अभियान, फिर बिलासपुर CMD मुख्यालय का महा-घेराव

मजदूरों के जनसैलाब को संबोधित करते हुए आरसीडब्ल्यूएफ (RCWF) के रणनीतिकार प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे ने आंदोलन के अगले कड़े चरण की घोषणा कर दी है। उन्होंने रणनीतिक खाका पेश करते हुए बताया कि आगामी जून से अगस्त 2026 के बीच एसईसीएल की तमाम कोयला खदानों और क्षेत्रों में कार्यरत एक-एक ठेका मजदूर का एक विस्तृत और प्रामाणिक डिजिटल डेटा (आंकड़े) एकत्रित करने का महा-अभियान चलाया जाएगा।

इस डेटा बैंक को तैयार करने के ठीक बाद, हजारों मजदूरों की वास्तविक संख्या बल के साथ एक व्यापक मांग पत्र सौंपने के लिए न्यायधानी बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी (CMD) हेडक्वार्टर का ऐतिहासिक और अनिश्चितकालीन महा-घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन और शासन की होगी।

इस विशाल और सफल जनसभा को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने वाले स्थानीय कर्मठ मजदूर नेताओं— अशोक पटेल, गोविंदा सारथी, विनोद सारथी, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, प्रकाश जयसवाल, महावीर यादव और छाल क्षेत्र से आए अजय सिंह ठाकुर सहित अन्य सैकड़ों कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत की मंच द्वारा सराहना की गई। अंत में UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह लड़ाई तो बस एक अंगड़ाई है, अपने पूरे हक को पाने तक यह संघर्ष लगातार और आक्रामक तरीके से जारी रहेगा।

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