जमीन पंजीयन में सरकारी शुल्क के अलावा 15 हजार की मांग? नामांतरण के लिए भी 3 हजार देने की चर्चा
तखतपुर उप पंजीयन कार्यालय में मीडिया की पड़ताल के दौरान स्टांप वेंडरों और दस्तावेज लेखकों से बातचीत में सामने आई अतिरिक्त शुल्क की बात, उप पंजीयक ने आरोपों को नकारा
बिलासपुर/तखतपुर। जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क के अलावा कथित रूप से अतिरिक्त राशि देने की चर्चा ने तखतपुर उप पंजीयन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया ने ग्राहक और जमीन विक्रेता बनकर कार्यालय परिसर में मौजूद तीन से चार स्टांप वेंडरों एवं दस्तावेज लेखकों से बातचीत की। इस दौरान मूल खसरे से किसी डायवर्टेड भूमि का पंजीयन कराने पर 15 हजार रुपये तथा नामांतरण की प्रक्रिया को डीएससी में चढ़ाने के नाम पर 3 हजार रुपये अतिरिक्त देने की बात सामने आई।
डायवर्टेड भूमि के पंजीयन पर 15 हजार अतिरिक्त?
पड़ताल के दौरान स्टांप वेंडरों और दस्तावेज लेखकों के बीच हुई चर्चा में बताया गया कि जमीन के पंजीयन के लिए शासन द्वारा निर्धारित शुल्क तो देना ही होगा, लेकिन यदि मूल खसरे में से डायवर्टेड भूमि का पंजीयन कराना है, तो इसके लिए 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं। यह राशि शासन के निर्धारित शुल्क से अलग बताई गई।
बातचीत में यह भी कहा गया कि उक्त राशि स्टांप वेंडर अथवा दस्तावेज लेखक के माध्यम से उप पंजीयक कार्यालय तक पहुंचाई जाती है। हालांकि, इस कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही यह स्पष्ट हो सका कि राशि किस अधिकारी या कर्मचारी को दी जाती है।
नामांतरण के लिए भी 3 हजार रुपये की चर्चा
पड़ताल में दूसरा मामला नामांतरण प्रक्रिया से जुड़ा सामने आया। दस्तावेज लेखन से जुड़े लोगों के बीच नामांतरण की प्रक्रिया को डीएससी में चढ़ाने के नाम पर 3 हजार रुपये अतिरिक्त देने की बात कही गई। चर्चा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सीधे संबंधित अधिकारी से बात कर ले या किसी नेता से फोन करवा दे, तो कथित 15 हजार रुपये की राशि से छूट मिल सकती है, लेकिन 3 हजार रुपये देने की बात फिर भी कही गई।
यदि ये दावे सही हैं, तो यह जांच का विषय है कि निर्धारित प्रक्रिया के अतिरिक्त राशि की मांग किस आधार पर की जा रही है और इसका लाभ किसे मिल रहा है। फिलहाल, इन कथनों के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
उप पंजीयक ने आरोपों को नकारा, बैठक लेने की बात कही
इस संबंध में उप पंजीयक आशीष तिवारी ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा, “इस तरह के सारे आरोप गलत हैं। अगर स्टांप वेंडर इस तरह की बातें कर रहे हैं, तो सोमवार को मैं सभी की बैठक लूंगा।”
उप पंजीयक के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित बैठक में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कार्यालय प्रबंधन कथित अतिरिक्त वसूली की शिकायतों की जांच कराता है।
जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
जमीन की रजिस्ट्री आम नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण और खर्चीली प्रक्रिया है। ऐसे में निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त राशि मांगे जाने की चर्चा भी लोगों के बीच भ्रम और असमंजस पैदा कर सकती है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि डायवर्टेड भूमि के पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रिया में कौन-कौन से शुल्क वैधानिक रूप से देय हैं तथा डीएससी में प्रविष्टि के नाम पर किसी अतिरिक्त भुगतान का कोई अधिकृत प्रावधान है या नहीं।
अब निगाहें सोमवार को होने वाली बैठक और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि अतिरिक्त वसूली के आरोपों में तथ्य मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
