जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की अनूठी पहल: ‘आरोहण प्रोजेक्ट’ के तहत भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेने रायपुर रवाना हुआ महिलाओं का दल
रायगढ़, 18 अगस्त: जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कंपनी ने उन्हें प्लांट और माइंस क्षेत्रों में भारी वाहन (हैवी व्हीकल) चलाने के लिए प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। इस अनूठी पहल को कंपनी प्रबंधन द्वारा ‘आरोहण प्रोजेक्ट’ नाम दिया गया है। पहले चरण में आसपास के विभिन्न गांवों की 15 महिलाओं और युवतियों का चयन किया गया है, जिन्हें 30 दिनों के प्रशिक्षण के लिए मंगलवार को रायपुर रवाना किया गया।
महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते
पारंपरिक रूप से माइंस और प्लांट के भीतर भारी वाहन चलाने का कार्य पुरुषों द्वारा ही किया जाता रहा है। जेपीएल प्रबंधन की इस पहल से अब महिलाएं भी इन क्षेत्रों में भारी वाहन चलाती नजर आएंगी। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उनके लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रशिक्षण दल को रवाना करने से पहले आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को प्रेरित किया गया। इस दौरान कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) श्री प्रदीप्ता कुमार मिश्रा ने कहा कि ‘आरोहण’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी छिपी हुई प्रतिभा को निखारना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ना समाज के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे:
- श्री संदीप सांगवान (एक्जीक्यूटिव वा이스 प्रेसिडेंट): उन्होंने ‘आरोहण प्रोजेक्ट’ को अन्य कौशल विकास परियोजनाओं से हटकर बेहद उपयोगी बताया।
- श्री आशीष कुमार (CHRO): उन्होंने चयनित महिलाओं से अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की तरह ऊंचे सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर श्री विजय जैन, श्री गोविंद कुमार, श्री एस.के. दुबे, श्री सुधीर रॉय, श्री राजेश रावत और सुश्री पायल सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
चयन प्रक्रिया और आगामी चरण
सीएसआर के एजीएम श्री राजेश रावत ने बताया कि ‘आरोहण’ कार्यक्रम के तहत गारे पेलमा (4/1, 4/2 एवं 3) तथा सेक्टर 1 बनाई भालूमुड़ा क्षेत्र के प्रभावित गांवों—कोसमपाली, सारसमाल, लिबरा, टपरंगा, जांजगीर, आमगांव और भालूमुड़ा—में सर्वे किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई।
परिवार की सहमति और पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र जैसी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, इच्छुक महिलाओं के लर्निंग लाइसेंस बनवाए गए।
- पहला चरण (रायपुर): मंगलवार को इन महिलाओं को रायपुर भेजा गया है, जहां वे इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IDTR) में 30 दिनों तक लाइट मोटर व्हीकल (LMV) चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी।
- इंटर्नशिप: आईडीटीआर से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये महिलाएं साल भर एलएमवी (LMV) चलाएंगी, जिसके दौरान कंपनी द्वारा इन्हें मानदेय भी दिया जाएगा।
- अंतिम चरण (हैवी व्हीकल): इसके पश्चात सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें 40 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, जिसके बाद वे माइंस और प्लांट में भारी वाहन (Heavy Vehicle) चलाने के पूरी तरह योग्य हो जाएंगी।
जेपीएल माइंस के सीईओ श्री ओमप्रकाश ने चयनित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं को ड्राइविंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना एक नई जिम्मेदारी है, जो उन्हें पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी।











