झाबू राखड़ डैम हादसा: बांध टूटने से जेसीबी ऑपरेटर की मौत, भ्रष्टाचार के आरोपों ने पकड़ा तूल

कोरबा, 21 अप्रैल। झाबू राखड़ डैम में हुए कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। बांध टूटने की घटना में एक जेसीबी ऑपरेटर की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद ठेकेदार कंपनी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।


बांध टूटने से गई जान

ताजा घटना में बांध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे मौके पर काम कर रहे जेसीबी ऑपरेटर की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।


ठेकेदार और अधिकारियों पर गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों ने ठेकेदार कंपनी शंकर इंजीनियरिंग पर आरोप लगाया है कि राखड़ सप्लाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। साथ ही कुछ रिटायर्ड अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया जा रहा है।


बिना सप्लाई के भुगतान का आरोप

आरोप है कि कई मामलों में बिना वास्तविक कार्य किए ही भुगतान कर दिया गया, जिससे विभाग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़कर देखा जा रहा है।


पहले भी मिली थी चेतावनी

सूत्रों के अनुसार, जूनियर इंजीनियर द्वारा पहले ही पत्र लिखकर कार्य में अनियमितता और बांध की मजबूती से समझौता किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


“ऊपर तक मिलीभगत” के आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि बड़े अधिकारी बच निकलते हैं। उनका आरोप है कि बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है।


एफआईआर और जांच की मांग

जनता और सामाजिक संगठनों ने शंकर इंजीनियरिंग के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC 304A) का मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही रिटायर्ड अधिकारियों की संपत्ति की जांच और पिछले तीन वर्षों के भुगतान व सप्लाई की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।


प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

हादसे के बाद भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो यह हादसा टल सकता था।


अब देखना यह होगा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है या फिर पहले की तरह इसे दबा दिया जाता है। पूरे मामले पर प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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