बलौदाबाजार : ₹5 हजार के लालच में दिया बैंक खाता, साइबर ठगी की रकम के ट्रांजैक्शन में इस्तेमाल; दो गिरफ्तार

पलारी पुलिस की कार्रवाई, राजस्थान के व्यक्ति से हुई ₹1.08 लाख की ऑनलाइन ठगी की जांच में सामने आया म्यूल अकाउंट का कनेक्शन

बलौदाबाजार-भाटापारा। साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले म्यूल अकाउंट के खिलाफ पलारी पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि एक युवक ने महज 5 हजार रुपये के लालच में अपना स्कॉलरशिप बैंक खाता दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध करा दिया था। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और कथित साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया गया।

राजस्थान के व्यक्ति से हुई थी ₹1,08,644 की ठगी

मामले की जांच राजस्थान के जयपुर निवासी कैलाशचंद सेन से हुई ऑनलाइन ठगी के बाद शुरू हुई। उनके साथ कुल 1 लाख 8 हजार 644 रुपये की साइबर ठगी हुई थी।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम यूको बैंक की पलारी शाखा में संचालित एक बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद पुलिस ने खाते के धारक खिलेंद्र वर्मा (21) को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

कमीशन के बदले दूसरे व्यक्ति को सौंपा था खाता

पूछताछ में खिलेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसने अपना बैंक खाता दीपेश मल्होत्रा (23) को दिया था। पुलिस के अनुसार दीपेश ने बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले पैसे कमाने का लालच दिया था।

खिलेंद्र के मुताबिक खाता मिलने के बाद दीपेश के पास उसका एटीएम कार्ड, पासबुक और नया एयरटेल सिम भी चला गया। इसके बाद खाते का संचालन दीपेश द्वारा किया जाता था और इसके बदले खिलेंद्र को कमीशन दिया जाता था।

खाते में लाखों रुपये के लेन-देन की जानकारी

पुलिस के अनुसार जांच में संबंधित बैंक खाते से बड़ी रकम के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी रकम को ट्रांसफर करने में किए जाने की बात कही गई है।

साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए ऐसे खातों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह के खातों को आमतौर पर म्यूल बैंक अकाउंट कहा जाता है।

₹5 हजार के बदले खाते का सौदा

पुलिस की जांच में सामने आया कि खिलेंद्र ने अपने खाते को कथित तौर पर सिर्फ 5 हजार रुपये के लालच में दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराया था। उसे यह अंदाजा नहीं था कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन में किया जा सकता है।

अब पुलिस खाते से जुड़े सभी ट्रांजैक्शन और आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटा रही है।

डेढ़ साल में 1,500 से ज्यादा साइबर ठगी के मामले

पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों के साथ-साथ म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की चुनौती भी बढ़ी है। पिछले करीब डेढ़ वर्ष में प्रदेश में 1,500 से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं।

साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टेबाजी में इस्तेमाल किए जा रहे 1,242 म्यूल बैंक खातों में करीब 3 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

117 खाताधारक और 5 एजेंट गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार म्यूल बैंक खातों से जुड़े मामलों में अब तक 117 खाताधारकों और 5 एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंट लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार करते थे।

ऐसे मामलों में खाताधारक खुद सीधे साइबर ठगी नहीं करता, लेकिन उसका बैंक खाता अपराध की रकम के ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल होने पर वह भी जांच के दायरे में आ जाता है।

थाना प्रभारी ने दी मामले की जानकारी

पलारी थाना प्रभारी परिवेश तिवारी के मुताबिक राजस्थान के एक व्यक्ति से हुई साइबर ठगी की जांच के दौरान रकम पलारी स्थित यूको बैंक के खाते में पहुंचने की जानकारी मिली थी।

जांच में खिलेंद्र द्वारा अपना पासबुक, एटीएम और नया सिम दीपेश को दिए जाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार खाते में ऑनलाइन गेमिंग और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित लाखों रुपये का लेन-देन मिला है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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