बालोद : माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में लिया तो 40 से अधिक बच्चे पहुंचे थाने, पीने के पानी के लिए प्रदर्शन
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पीने के पानी की मांग को लेकर चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। पुलिस ने सड़क पर चक्काजाम और आमरण अनशन कर रहे ग्रामीणों को हिरासत में लिया तो उनके 40 से अधिक बच्चे करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर थाने पहुंच गए। बच्चों ने पुलिस से अपने माता-पिता को छोड़ने और गांव में पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की। पुलिस ने बच्चों को थाने के गेट के पहले ही रोक दिया, जिसके बाद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।
माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के बाद थाने पहुंचे बच्चे
मामला दल्ली राजहरा-महामाया मार्ग का है, जहां आड़ेझर गांव के ग्रामीण बोइरडीही जलाशय से पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। ग्रामीण पिछले तीन दिनों से सड़क पर चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान नौ ग्रामीण आमरण अनशन पर भी बैठे थे।
शनिवार सुबह पुलिस ने आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को वहां से हटाकर हिरासत में ले लिया। इसके बाद 40 से अधिक बच्चे पैदल चलकर थाने पहुंचे। बच्चों की मांग थी कि उनके माता-पिता को छोड़ा जाए और गांव में पीने के पानी की व्यवस्था की जाए।
132 से अधिक ग्रामीण पुलिस अभिरक्षा में
प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 102 पुरुषों को दल्ली राजहरा के ओपन थिएटर और 30 से 40 महिलाओं को आईटीआई परिसर में पुलिस अभिरक्षा में रखा गया। प्रशासन ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन सहमति नहीं बनने के बाद कार्रवाई की गई।
बोइरडीही जलाशय से पानी देने की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग बोइरडीही जलाशय से आड़ेझर गांव के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था।
दूसरी ओर, चक्काजाम के कारण महामाया, दुलकी और कलवर माइंस से कच्चा लोहा लेकर आने-जाने वाले वाहनों का आवागमन भी प्रभावित हुआ। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन चलते हैं।
पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में नाराजगी
आंदोलनकारियों को हटाए जाने के बाद गांव में नाराजगी का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ा जाए और पेयजल समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।
फिलहाल, ग्रामीणों की मांग और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। गांव में पेयजल की समस्या के समाधान को लेकर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
