बाल संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सोशल मीडिया पर बच्चों के शोषण वाले कंटेंट को लेकर केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री की उपलब्धता और ऐसी सामग्री की रिपोर्टिंग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
मामला बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री सामने आने पर भारत में संबंधित पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) को सीधे रिपोर्ट करने के बजाय अन्य माध्यमों से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
केंद्र की दो मंत्रालयों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और कानून एवं न्याय मंत्रालय को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है और दोनों मंत्रालयों को उससे दो सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही का मुद्दा
याचिका में सोशल मीडिया मध्यस्थों द्वारा बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री की रिपोर्टिंग और कार्रवाई के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि प्लेटफॉर्म भारत में कानून के तहत निर्धारित रिपोर्टिंग दायित्वों का किस तरह पालन कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में भी ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े मामले में बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।











