
भारत-रूस RELOS समझौता लागू: दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकेंगे सैनिक और सैन्य संसाधन
नई दिल्ली/मॉस्को, 19 अप्रैल (RNS)। भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समझौता RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) अब लागू हो गया है। फरवरी 2025 में हुए इस समझौते को जनवरी 2026 से प्रभावी किया गया है।
3,000 सैनिक और सीमित सैन्य संसाधन तैनात करने की अनुमति
इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में अधिकतम 3,000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान तैनात कर सकते हैं। रूस की आधिकारिक कानूनी सूचना पोर्टल के अनुसार, रूसी संसद ने दिसंबर 2025 में इस समझौते को मंजूरी दी थी।
5 वर्षों के लिए लागू, आगे बढ़ाया जा सकेगा
RELOS समझौता शुरुआती तौर पर 5 वर्षों के लिए लागू रहेगा। इसके बाद दोनों देशों की सहमति से इसे अगले 5 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
सैन्य सहयोग और मरम्मत में मिलेगा फायदा
यह समझौता भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा। खासतौर पर रूसी मूल के सैन्य उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव और लॉजिस्टिक सपोर्ट में यह अहम भूमिका निभाएगा।
क्या-क्या सुविधाएं शामिल हैं
समझौते के तहत दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों—जैसे बंदरगाह और हवाई अड्डों—तक पहुंच मिलेगी। इसमें शामिल प्रमुख सुविधाएं:
- युद्धपोतों के लिए पोर्ट एक्सेस, मरम्मत और आपूर्ति सेवाएं
- सैन्य विमानों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल, नेविगेशन और पार्किंग सुविधा
- ईंधन, भोजन, पानी और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता
- खराब उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव
संयुक्त अभ्यास और मानवीय मिशनों को बढ़ावा
RELOS समझौते में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और आपदा राहत जैसे मानवीय मिशनों को भी शामिल किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच ऑपरेशनल समन्वय बेहतर होगा।
रणनीतिक दृष्टि से अहम समझौता
पश्चिम एशिया और यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक तनावों के बीच यह समझौता रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारत को रूसी नौसैनिक और हवाई अड्डों—यहां तक कि आर्कटिक क्षेत्र—तक पहुंच मिलेगी, जबकि रूस को भारतीय सैन्य सुविधाओं तक व्यापक पहुंच प्राप्त होगी।
यह समझौता भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ वैश्विक रणनीतिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


