मर्डर केस में बरी हुआ भाजपा नेता, तो जेल से 70 Km तक निकला विजय जुलूस, केस दर्ज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में वर्ष 2020 में CAA-NRC विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई एक हत्या के मामले में भाजपा नेता विनय वार्ष्णेय को अदालत ने 6 जुलाई को बरी कर दिया है। कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के एक दिन बाद विनय वार्ष्णेय और उनके समर्थकों ने गुरुवार (7 जुलाई) को एटा जिला जेल से अलीगढ़ तक भव्य जुलूस निकाला। इसको लेकर पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में सभी लोगों पर थाना लोधा में मामला दर्ज किया है।

दरअसल, विनय वार्ष्णेय के क़त्ल के मामले से बरी होने पर उनके समर्थकों ने उनके भव्य में एटा जिला जेल से अलीगढ़ तक जुलूस निकाला था। बता दें कि वार्ष्णेय को अलीगढ़ में CAA-NRC विरोध के दौरान मोहम्मद तारिक की गोली मारकर हत्या के आरोप में अरेस्ट किया गया था। इसके बाद से ही वार्ष्णेय जेल में थे। वहीं, 848 दिन बाद विनय के जेल से बाहर आने पर अलीगढ़ के कई चौराहों पर फूल बरसाए गये और देर शाम देहली गेट इलाके में भी आतिशबाजी की गई। जूलुस के कारण शहर में कई जगहों पर जाम लग गया। इस पर पुलिस अधीक्षक सिटी कुलदीप सिंह ने बताया कि जिले धारा 144 लागू है। इस हाल में भीड़ जुटाना कानून का उल्लंघन है। जिसको लेकर भाजपा नेता विनय वार्ष्णेय व उनके डेढ़ सौ से ज्यादा अज्ञात समर्थकों पर मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में हत्या के मामले से रिहा होने के बाद विनय वार्ष्णेय फिर से विवादों में घिर गए हैं।

बता दें कि 6 जुलाई को जिला जज डा. बब्बू सारंग की कोर्ट ने अलीगढ़ के बाबरी मंडी के तारिक के क़त्ल के मामले में अहम गवाहों के मुकर जाने पर विनय वार्ष्णेय और उनके दो अन्य सह आरोपियों, सुरेंद्र कुमार और उनके बेटे त्रिलोकी को बरी कर दिया था। दरअसल, इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि सुनवाई के दौरान मामले के शिकायतकर्ता समेत सभी पांच अहम गवाह मुकर गए। विनय की लाइसेंसी पिस्तौल को बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया था, मगर यह तारिक को लगी गोलियों से मेल नहीं खाती थी।

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