मेसन ट्रेनिंग में लाखों रुपये के खर्च पर उठे सवाल, आरटीआई से मिली जानकारी के बाद जांच की मांग तेज

घरघोड़ा। जनपद पंचायत घरघोड़ा में मेसन ट्रेनिंग कार्यक्रम के संचालन और खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय स्तर पर वित्तीय अनियमितता और प्रक्रिया संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले में निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच मेसन ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए लगभग 26 लाख रुपये का आबंटन स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि पूरी राशि प्राप्त होने से पहले ही वर्ष 2023-24 में प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण किए जाने का दावा कर दिया गया। इससे खर्च और प्रशिक्षण प्रक्रिया की वास्तविकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल

जानकारी के मुताबिक मेसन ट्रेनिंग के लिए नियमानुसार पंजीकृत एवं अधिकृत प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जानी चाहिए थीं। आरोप है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया दोनों जांच के दायरे में आ सकती हैं।

मास्टर रोल के उपयोग को लेकर विवाद

मामले में एक और गंभीर सवाल पंचायत स्तर पर तैयार किए गए मास्टर रोल को लेकर उठाया गया है। आरोप है कि सरपंच और सचिव के हस्ताक्षरयुक्त मास्टर रोल को भुगतान संबंधी दस्तावेजों के रूप में उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया की वैधता और प्रशासनिक अनुमति की भी जांच की जानी चाहिए।

ऑडियो और कथित स्वीकारोक्ति से बढ़ा विवाद

मामले को लेकर चर्चा तब और तेज हो गई जब कथित रूप से प्रशिक्षण से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा राशि के बंटवारे और दस्तावेजी औपचारिकताओं को लेकर कुछ स्वीकारोक्ति किए जाने का दावा किया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि इन दावों की जांच की जाए तो पूरे मामले में कई जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच की मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रशिक्षण वास्तव में आयोजित हुए थे या नहीं, खर्च की गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया तथा सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।

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