रायगढ़ जिले में ऑपरेशन शंखनाद को चुनौती दे रहे तस्कर पुलिस की कड़ी निगरानी के बाद भी गौवंश तस्करी जारी


बदला तस्करी का पैंतरा कड़ाई के बाद अब चार छह मवेशियों की टुकड़ियों में हो रही तस्करी

कुड़ेकेला :- जब से जिला पुलिस कप्तान एस एस पी शशि मोहन सिंह ने रायगढ़ जिले की कमान संभाली है अपराधियों और असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त नजर आ रहे हैं। जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में अपराध पर लगाम कसने के लिए कप्तान द्वारा कई विशेष मुहिम चलाई गईं जिनमें पुलिस को बड़ी सफलताएं भी मिलीं। जिले में अपराध का ग्राफ घटा और अपराधियों के लिए पैर पसारने की जगह तक कम पड़ने लगी। लेकिन इस सब के बीच क्षेत्र में सक्रिय गौवंश तस्कर पुलिस के ऑपरेशन शंखनाद को खुली चुनौती देने में लगे हुए हैं।
तस्करों के नेटवर्क पर पुलिस की तेज नजर के बावजूद गौवंश तस्करी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। फर्क सिर्फ इतना आया है कि पुलिस की कड़ाई के बाद तस्करों ने अपना पैंतरा और तस्करी का तरीका बदल लिया है।
स्लीपर सेल से छोटे गिरोहों तक ऐसे बदला तस्करी का पैटर्न:-मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के सीमावर्ती जिला सक्ती से लगे इलाकों में पहले गौवंश की बड़े पैमाने पर तस्करी होती थी। वहां स्लीपर सेल की तर्ज पर काम कर रहे तस्करों के सिंडिकेट पर जब पुलिस ने शिकंजा कसा और चौकसी बढ़ाई तो तस्करों में हड़कंप मच गया। हालांकि इस पर पूरी तरह लगाम लगने के बजाय तस्करों ने नई रणनीति अपना ली है। अब बड़ी खेप के बजाय चार-छह की संख्या में गौवंश को टुकड़ियों में ले जाकर तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है ताकि किसी की नजर उन पर न पड़े।
लोगों के मन में उठ रहे सवाल:-क्षेत्र में लगातार बदल रहे तस्करी के इस खेल को लेकर अब आम जनता और गौ-सेवकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है
क्या जिला पुलिस प्रशासन क्षेत्र के इन शातिर गौवंश तस्करों की शिनाख्त कर उन पर नकेल कसेगी
क्या जिले में चल रहे इस अवैध कारोबार को पूर्ण रूप से बंद कराने के लिए कोई मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि पुलिस क्षेत्र में सक्रिय स्थानीय मददगारों और बिचौलियों को चिन्हित कर उन पर कड़ी से कड़ी वैधानिक कार्रवाई करे तभी इस तस्करी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ी जा सकती है।
अब देखना यह होगा कि खाकी का खौफ दिखाते हुए पुलिस इन चालाक तस्करों के नए मंसूबों को कैसे ध्वस्त करती है और ऑपरेशन शंखनाद के तहत तस्करी के इस खेल पर पूर्ण विराम कब तक लगता है।

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