रायगढ़ : शासकीय जमीन पर कब्जे के मामले में ढाई लाख रुपये का चेक देने का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

कुड़ेकेला। रायगढ़ जिले के छाल तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत नवापारा में शासकीय भूमि और पंचायत की राशि से जुड़े एक मामले ने विवाद खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकान के संबंध में तत्कालीन पंचायत पदाधिकारियों ने संबंधित व्यक्ति के पक्ष में ढाई लाख रुपये का चेक जारी किया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच और शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की है।

शासकीय जमीन पर बने मकान को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, पंचायत क्षेत्र की शासकीय भूमि पर एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से कब्जा कर 7 से 8 कमरों का मकान बनाया गया है। आरोप है कि इस मामले में अतिक्रमण हटाने या भूमि संबंधी कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन सरपंच और सचिव की ओर से अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई।

ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित कर संबंधित मकान के कमरों से मिलने वाले किराये को पंचायत द्वारा वसूलने की बात कही गई थी। इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति के नाम पर 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने का प्रस्ताव होने और उसकी पहली किश्त के रूप में 2.50 लाख रुपये का चेक दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इस प्रस्ताव और चेक जारी किए जाने की वैधानिकता तथा राशि किस मद से स्वीकृत की गई, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सरकारी राशि के इस्तेमाल पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी पंचायत व्यवस्था की है, उसी शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में संबंधित व्यक्ति को पंचायत निधि से राशि दिए जाने का निर्णय गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है और उस पर अतिक्रमण हुआ है, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई और पंचायत की ओर से संबंधित व्यक्ति को राशि दिए जाने का आधार क्या था।

कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में शासकीय भूमि की जांच और सीमांकन, कथित अतिक्रमण की पुष्टि होने पर उसे हटाने की कार्रवाई तथा पंचायत की राशि से संबंधित दस्तावेजों की जांच शामिल है।

उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में सरकारी राशि के नियम विरुद्ध उपयोग या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार तत्कालीन पंचायत पदाधिकारियों और लाभार्थी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही साफ होगी राशि जारी करने की वैधानिकता

मामले में फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप और शिकायत सामने आई है। चेक किस मद से जारी किया गया, पंचायत प्रस्ताव में वास्तव में क्या निर्णय लिया गया, राशि की स्वीकृति किस आधार पर हुई और संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है, इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक जांच जरूरी है।

अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत द्वारा जारी राशि नियमों के अनुरूप थी या नहीं और शासकीय भूमि पर कथित कब्जे को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

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