रायगढ़ हत्या मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक जांच पर लगाई रोक, पुलिस को सख्ती से बचने की हिदायत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सहमति के बिना नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं करा सकती पुलिस

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्र और स्पष्ट सहमति के बिना उसे नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग (BEAP) या किसी अन्य वैज्ञानिक जांच के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने रायगढ़ जिले के एक हत्या मामले में पुलिस प्रताड़ना की शिकायत पर सुनवाई करते हुए संबंधित याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की है।

रायगढ़ हत्या मामले से जुड़ा है प्रकरण

मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र में दर्ज एक हत्या प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238(A) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर लक्ष्मीनारायण पटेल और अर्धना भगत को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।

18 दिनों तक प्रताड़ित करने का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य भी नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने बीएनएसएस (BNSS) के तहत विधिवत नोटिस जारी किए बिना उन्हें लगातार 18 दिनों तक थाने बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और लंबे समय तक थाने में बैठाए रखा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव बनाकर सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर कराए और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना उनका मोबाइल भी जब्त कर लिया।

नार्को और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए दबाव का आरोप

याचिका में कहा गया कि पुलिस ने बिना न्यायालय की अनुमति और बिना सहमति के नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने के लिए नोटिस जारी किया और रायपुर में उपस्थित होने को कहा।

हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक जांच पर लगाई रोक

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) या अन्य समान वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे परीक्षण आवश्यक हों तो उन्हें केवल संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्पष्ट और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति के आधार पर ही कराया जा सकता है।

पुलिस को दी सख्ती से बचने की हिदायत

हाईकोर्ट ने पुलिस को जांच के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और अनावश्यक दबाव या प्रताड़ना से बचने की हिदायत दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के संबंध में किसी भी प्रकार के नार्को, पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग या अन्य वैज्ञानिक परीक्षण पर फिलहाल रोक लगा दी है।

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