रायगढ़ : 52 लाख के ‘भ्रष्टाचार का एनीकेट’ उद्घाटन से पहले ही हुआ जर्जर; ग्रामीणों का आरोप- इंजीनियर और ठेकेदारों की मिलीभगत से बना ‘कब्रिस्तान’

रायगढ़: रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर, छत्तीसगढ़ की सीमा पर बसे बेलेरिया गांव में जल संसाधन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता नमूना सामने आया है। जिस एनीकेट (स्टॉप डेम) को किसानों की किस्मत बदलने के लिए बनाया गया था, वह निर्माण पूरा होने से पहले ही दरकने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इंजीनियरों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को लूटने का काम किया है।

लोकार्पण से पहले ही खुल गई पोल

13 जनवरी 2025 को कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन हुआ था। महज डेढ़ साल में इसे पूर्ण बताकर मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण कराने की तैयारी थी, लेकिन ग्रामीणों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचित किया कि एनीकेट न केवल अधूरा है, बल्कि जगह-जगह से क्रैक भी हो चुका है। डेम के साथ प्रस्तावित ‘पचरी’ निर्माण भी आज तक फाइलों में ही दफन है।

गुणवत्ताहीन निर्माण, भ्रष्टाचार का ‘महाघोटाला’

लगभग 52 लाख रुपये की लागत से बना यह एनीकेट निर्माण गुणवत्ता के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। पूर्व सरपंच एवं किसान इंद्र विलास पंडा ने सीधे तौर पर जल संसाधन संभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह एनीकेट किसानों के लिए वरदान बनने के बजाय भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है।

300 एकड़ की उम्मीद, भ्रष्टाचार की भेंट

यदि यह एनीकेट गुणवत्तापूर्ण बनता, तो बेलेरिया गांव की लगभग 300 एकड़ उपजाऊ भूमि सिंचित होती और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरती। लेकिन, विभागीय अधिकारियों की अंधाधुंध लूट और इंजीनियरों की ‘आंखें मूंदकर’ की गई मॉनिटरिंग ने इस सपने को चकनाचूर कर दिया है।

कलेक्टर के संज्ञान के बाद भी चुप्पी क्यों?

ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में भी की है, लेकिन अब तक न कोई जांच हुई और न ही दोषी अधिकारी-ठेकेदार पर कोई कार्रवाई। ग्रामीणों का सवाल है—आखिर किसके संरक्षण में इतना बड़ा भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है? उद्घाटन की जल्दी में क्या प्रशासन इस भ्रष्टाचार को लीपापोती करने में जुटा है?
प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस ‘जर्जर एनीकेट’ और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करता है, या फिर यह भ्रष्टाचार भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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