रायपुर में जूनियर डॉक्टरों का OPD बहिष्कार, धरना स्थल पर ही मरीजों का इलाज; 28 सितंबर से इमरजेंसी बंद करने की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने गुरुवार से OPD सेवाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया। जूनियर डॉक्टर मेडिकल कॉलेज कैंपस में धरने पर बैठे हैं। हालांकि मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए डॉक्टरों ने धरना स्थल पर ही समानांतर OPD शुरू कर दी है, जहां मरीजों की जांच कर प्रिस्क्रिप्शन दिया जा रहा है।

JDA का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब डॉक्टर मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित आदेश की मांग कर रहे हैं। मांगों पर जल्द निर्णय नहीं होने पर 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी दी गई है।

JDA की तीन प्रमुख मांगें

1. बॉन्ड व्यवस्था खत्म करने की मांग

JDA डॉक्टरों की बॉन्ड व्यवस्था समाप्त करने की मांग कर रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ सुपर स्पेशलिटी पाठ्यक्रमों में करीब 75 लाख रुपये तक की बॉन्ड राशि का प्रावधान है। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी राशि की बाध्यता आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए परेशानी पैदा करती है।

2. सुपर स्पेशलिटी कैडर बनाने की मांग

JDA ने प्रदेश में Super Specialty Cadre बनाने की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि सुपर स्पेशलिटी सेंटरों में पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती और कैडर की व्यवस्था होने से लिवर, किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर कैंसर समेत जटिल बीमारियों के उपचार की सुविधाएं प्रदेश में विकसित की जा सकेंगी।

3. उचित मानदेय की मांग

JDA ने इंटर्न, रेजिडेंट, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टरों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की है। संगठन के अनुसार, कुछ डॉक्टरों को वर्तमान में करीब 15,900 रुपये का भुगतान मिल रहा है और वे जिम्मेदारी के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय चाहते हैं।

धरना स्थल पर ही मरीजों की OPD

JDA अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। OPD बहिष्कार के बावजूद मरीजों को वापस नहीं भेजा जा रहा है। धरना स्थल पर ही डॉक्टर मरीजों की जांच और इलाज कर रहे हैं।

JDA के अनुसार रायपुर के अलावा बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट, इंटर्न, PG बॉन्डेड और MBBS बॉन्डेड डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल हैं।

डॉक्टरों ने कहा है कि यदि मांगों पर जल्द लिखित निर्णय नहीं हुआ तो 28 सितंबर से आंदोलन को और व्यापक करते हुए इमरजेंसी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार का कदम उठाया जा सकता है।

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