सारदा एनर्जी की मनमानी : छाल क्षेत्र में उड़ती राख और ओवरलोड वाहनों से स्थानीय जनता का जीना बेहाल

कुड़ेकेला: औद्योगिक विकास की आड़ में आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। दर्रामुड़ा स्थित सारदा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड से निकलने वाली फ्लाई ऐश (Fly Ash) अब खरसिया और छाल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए एक धीमा जहर साबित हो रही है। नियमों और मापदंडों को ताक पर रखकर रोजाना दर्जनों ओवरलोड हाइवा इस जहरीली राख को सड़कों पर बिखेरते हुए गुजर रहे हैं, जिससे उठते धूल के गुबार ने राहगीरों और स्थानीय निवासियों का सांस लेना दूभर कर दिया है।

सड़कों पर बिछी राख की सफेद चादर

बीती 11 अगस्त को छाल मार्ग से गुजरने वाले लोग तब हैरान रह गए जब पूरी सड़क फ्लाई ऐश की एक परत से ढक गई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो सड़क पर राख का तूफान आ गया हो। स्थानीय लोगों ने जब सड़क पर अंधाधुंध राख बिखेरते जा रहे हाइवा (क्रमांक CG 12 BU 1926) को रोककर पूछताछ की, तो चालक ने खुलासा किया कि वह सारदा एनर्जी दर्रामुड़ा से फ्लाई ऐश लोड करके कोरबा जिले के चांपा-कोरबा क्षेत्र की ओर जा रहा था।

  • परिवहन के दौरान न तो गाड़ियों को तिरपाल से ढका गया था और न ही पर्यावरण मानकों का कोई पालन किया जा रहा था।
  • वाहन से लगातार टपकती और हवा में उड़ती राख के कारण पूरे रास्ते में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई, जिससे बड़े सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
  • सड़कों पर जमी राख की परत के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

पर्यावरण नियमों की धज्जियां और स्वास्थ्य पर खतरा

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुसार फ्लाई-ऐश का परिवहन पूरी तरह से कवर्ड (ढके हुए) और वायुरुद्ध वाहनों में किया जाना अनिवार्य है ताकि धूल हवा में न घुले। हालांकि, सारदा एनर्जी के संयंत्र से निकलने वाले इस कचरे का निपटान जिस बेपरवाही से किया जा रहा है, उससे साफ है कि कंपनियों को न तो प्रशासनिक तंत्र का खौफ है और न ही आम जनता की जान की परवाह।

  • उड़ती हुई फ्लाई ऐश हवा के साथ सीधे फेफड़ों में जमा हो रही है।
  • इससे क्षेत्र में दमा, टीबी, सिलिकोसिस और आंखों में जलन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

छाल और आसपास के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध और लापरवाही भरे परिवहन पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। स्थानीय नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन से कड़े शब्दों में मांग की है कि सारदा एनर्जी और परिवहन कार्य में संलग्न ठेकेदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखने यह होगा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या कदम उठाता है।

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