हसदेव अरण्य और रामगढ़ बचाने कांग्रेस का आंदोलन, खनन परियोजनाओं के खिलाफ खोला मोर्चा
जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य और रामगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित एवं संचालित खनन परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि खनन परियोजनाओं के कारण पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।
हसदेव और रामगढ़ को लेकर कांग्रेस का अभियान
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हसदेव अरण्य और रामगढ़ क्षेत्र केवल वन संपदा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़े हुए हैं। पार्टी का कहना है कि खनन विस्तार से जंगलों का नुकसान होगा और स्थानीय समुदायों का विस्थापन बढ़ सकता है।
आदिवासी अधिकारों का मुद्दा प्रमुख
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA) की भावना के अनुरूप ग्राम सभाओं की सहमति और स्थानीय समुदायों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। पार्टी ने आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूत करने की मांग उठाई है।
प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस का कहना है कि हसदेव अरण्य और रामगढ़ क्षेत्र को बचाने के लिए जनजागरण अभियान, धरना-प्रदर्शन और जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को आंदोलन से जोड़ने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
हसदेव अरण्य क्यों है महत्वपूर्ण?
हसदेव अरण्य को मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में गिना जाता है। यह क्षेत्र जैव विविधता, वन्यजीवों और आदिवासी समुदायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षों से यहां खनन परियोजनाओं को लेकर विवाद और आंदोलन होते रहे हैं।
खनन को लेकर पहले भी हो चुके हैं विरोध प्रदर्शन
पिछले कुछ वर्षों में हसदेव क्षेत्र में खनन परियोजनाओं के विरोध में आदिवासी संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा कई आंदोलन किए जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर खनन से जंगल, जल स्रोत और स्थानीय जीवन प्रभावित होगा।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
हसदेव अरण्य और रामगढ़ का मुद्दा अब एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां खनन परियोजनाओं का विरोध कर रही है, वहीं सरकार और संबंधित विभागों का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी की जा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना है।



