हाथियों के महादल ने सफल किया चोपट तरेकेला में अन्नदाता पर टूटी तिहरी मार दसों एकड़ धान की फसल पल भर में तबाह



पेट काटकर जिसने सींचा उस फसल पर फिर आफत आई।
छाती पर रखकर पत्थर किसान ने अपनी किस्मत रुलाई।


कुड़ेकेला :- रायगढ़ जिले के कृषि क्षेत्रों में आज देश का अन्नदाता दो वक्त की रोटी और अपनी जीविका की रक्षा के लिए तड़प रहा है। जो किसान अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह कृषि पर निर्भर है और दिन रात आसमान की ओर ताकते हुए बारिश का इंतजार करता है वह आज कुदरत और जंगली जानवरों के दोहरे तिहरे वार से खून के आंसू रोने को मजबूर है। सही समय पर बारिश न होने से पैदा हुई सूखे की मार से जैसे जैसे तिनका तिनका जोड़कर किसान उबरे थे कि अब हाथियों के आतंक ने उनके सपनों को पैरों तले रोंद दिया है।

ताजा मामला जिले के तरेकेला क्षेत्र का है जहां बीते रात हाथियों के एक विशाल महादल ने धावा बोल दिया। 30 से 35 हाथियों के इस दल ने आधी रात को खेतों में घुसकर तबाही का ऐसा नाच नाचा कि देखते ही देखते किसानों के महीनों की गाढ़ी कमाई और खून पसीने की मेहनत जमींदोज हो गई। खेत में लहलहाती हरी भरी धान की फसल जिसे देखकर किसान की आंखों में उम्मीद की चमक चमक रही थी उसे हाथियों ने मिनटों में तहस नहस कर दिया।

इस भयंकर तबाही का सबसे बड़ा शिकार क्षेत्र के प्रमुख किसान मोहन पटैल, गौटिया राम, शिव सागर, चंद्रशेखर सहित अन्य ग्रामीण हुए हैं। हाथियों के दल ने इन किसानों की दसों एकड़ में खड़ी लहलहाती धान की फसल को पूरी तरह रौंदकर चौपट कर दिया है। सुबह जब किसान अपने खेतों का मंजर देखने पहुंचे तो अपनी तबाह हो चुकी मेहनत को देख उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। किसानों के माथे पर अब गहरी चिंता और तंगहाली की लकीरें साफ पढ़ी जा सकती हैं।


बारिश की बेरुखी, कर्ज का बोझ और अब हाथियों की यह जानलेवा आफत इन तीन पाटों के बीच पिस्ता अन्नदाता आज लाचार और बेबस खड़ा है। तरेकेला के पीड़ित किसानों ने शासन प्रशासन से तत्काल मौके का मुआयना कर मुआवजा देने और हाथियों के दल को खदेड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है।

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