अदाणी ग्रुप की ए ई एस एल बनी ग्लोबल नंबर 1 दुनिया की दिग्गज कंपनियों को पछाड़ रचा इतिहास
कुड़ेकेला :-भारतीय कॉरपोरेट जगत से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है. देश की सबसे बड़ी प्राइवेट पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने पूरी दुनिया में अपना डंका बजाते हुए वैश्विक स्तर पर पहला स्थान हासिल कर लिया है। दिग्गज रेटिंग एजेंसी एस एन्ड पी ग्लोबल के ताजा ईएसजी स्कोर में ए ई एस एल ने दुनिया की तमाम बड़ी यूटिलिटी कंपनियों को पटखनी देते हुए नंबर-1 का ताज अपने नाम कर लिया है।
81 से सीधे 90 स्कोर में आई तूफानी बढ़त
एस एन्ड पी ग्लोबल द्वारा किए गए मीडिया एंड स्टेकहोल्डर एनालिसिस रिव्यू के बाद कंपनी के गवर्नेंस से जुड़े पुराने आकलनों में बड़ा सुधार हुआ है। इस रिव्यू के आते ही ए ई एस एल का ईएसजी पर्यावरण सामाजिक और गवर्नेंस स्कोर 100 में से सीधे 90 पर जा पहुंचा। बता दें कि इस सेक्टर का वैश्विक औसत महज 41 है जबकि रिव्यू से पहले ए ई एस एल 81 के स्कोर पर थी। सालाना आधार पर ए ई एस एल के स्कोर में 17 अंकों की जोरदार छलांग दर्ज की गई है।
हर मोर्चे पर दिखाया दम विरोधियों के छूटे पसीने:-
कंपनी ने ईएसजी के तीनों ही मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी ताकत का अहसास कराया है:
पर्यावरण 93 का दमदार स्कोर सामाजिक 89 का बेहतरीन स्कोर गवर्नेंस एवं आर्थिक 84 का मजबूत प्रदर्शन क्लाइमेट स्ट्रेटेजी प्रोडक्ट मैनेजमेंट और ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट जैसे पैमानों पर कंपनी ने उद्योग जगत के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
सीईओ कंदर्प पटेल का बड़ा बयान :- इस ऐतिहासिक जीत पर गदगद AESL के सीईओ कंदर्प पटेल ने कहा एसएंडपी ग्लोबल द्वारा एईएसएल को दुनिया की नंबर-1 ईएसजी यूटिलिटी कंपनी चुनना हमारे लिए बेहद गर्व का पल है। सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन एनर्जी हमारी रग-रग में शामिल है। यह हमारी पूरी टीम के कड़े समर्पण और पारदर्शी प्रक्रियाओं का नतीजा है।
बिजली की दुनिया का असली बादशाह अदाणी पोर्टफोलियो की यह कंपनी सिर्फ दावों में ही नहीं जमीन पर भी सबसे आगे है। AESL के पास आज 29,739 सर्किट किलोमीटर का विशाल ट्रांसमिशन नेटवर्क और 1,43,425 MVA की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता है। मुंबई और मुंद्रा SEZ में 13 मिलियन से ज्यादा उपभोक्ता इसकी बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्मार्ट मीटरिंग और ग्रीन एनर्जी के दम पर अब अदाणी की यह कंपनी दुनिया भर की यूटिलिटी कंपनियों पर भारी पड़ती नजर आ रही है.












