आरक्षण पर विवाद: नेता प्रतिपक्ष बोले- चुनावी फायदे के लिए बिना तैयारी के किया पेश, अब राज्यपाल पर लगा रहे आरोप

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नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि, मुख्यमंत्री अब राज्यपाल पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। राज्यपाल का अपना विवेकाधिकार होता है। इसलिए मुख्यमंत्री को अनपनी मर्यादा में रहकर बयानबाजी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, भाजपा आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन सरकार को पहले डाटा रिपोर्ट पेश करनी चाहिए।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पास तो हो गया है, लेकिन इसे जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। एक ओर अभी तक राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, वहीं भाजपा इसे लेकर कांग्रेस और मुख्यमंत्री पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि चुनावी फायदे के लिए बिना किसी तैयारी के लिए आरक्षण विधेयक पेश किया गया। अब राज्यपाल पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।

बिना तैयारी आरक्षण विधेयक मुख्यमंत्री की हड़बड़ी
मनेंद्रगढ़ के जनकपुर में एक दिवसीय प्रवास पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष चंदेल ने कहा कि, बिना तैयारी के आरक्षण विधेयक पास करना मुख्यमंत्री की हड़बड़ी को दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर उपचुनाव में लाभ लेने के लिए कांग्रेस ने आरक्षण बिल प्रस्तुत कर दिया। नियमानुसार पहले उन्हें डाटा आयोग की रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी। अब मुख्यमंत्री अपनी गलती का ठीकरा भाजपा पर फोड़ना चाह रही है।

कोयला, शराब और रेत को लेकर भी निशाना साधा
नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल कहा कि, पूरे प्रदेश में कोयला, शराब और रेत का अवैध कारोबार चरम पर है। आरोप लगाया कि, कांग्रेस के लोग कोयले में जमकर कमीशन खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ में कोल माफिया, रेत माफिया, शराब माफिया, जमीन माफिया ये सारी चीजें भूपेश की सरकार में खुलेआम संचालित हो रही हैं। अवैध कारोबार के कारण छत्तीसगढ़ में नित नए किस्म के अपराध हो रहे हैं।

सदन में भी ध्यान आकर्षित कराया
उन्होंने कहा कि, एक बार नहीं, हमने अनेक बार विधानसभा में इस ओर ध्यान आकर्षित किया। सदन में भी हमने इस बात को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि, ईडी ने अपने प्रेस नोट में कहा, 25 रुपये टन कोल में कमीशन लिया जा रहा है। अभी अधिकारियों के यहां ईडी का छापा पड़ रहा है। 100 करोड, डेढ़ सौ करोड़, 200 करोड़ रुपसे मिल रहे हैं। ये कहां से आ रहे हैं। इस दौरान अनुराग सिंह देव, पूर्व संसदीय सचिव चंपा देवी पावले, सहित अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

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