छुरा पांडुका वन परीक्षेत्र के जंगलों में धधक रही आग

गरियाबंद भूपेंद्र गोस्वामी आपकी आवाज

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गरियाबंद–केन्द्र व प्रदेश सरकार के द्वारा वनों को सहेजने अपने नए-नए नित नियम वन विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। जो नियम केवल कागज तक ही सीमित रह रह गई है । जंगलों में भीषण आग लगी है और वन विभाग द्वारा फायर वाचर की नियुक्ति भी की गई है व आग से बचाने के लिए रोड किनारे सूखे पत्तों की साफ-सफाई ,जंगल को आग से बचाने के लिए कई कार्यशाला का आयोजन, जैसे अनेक ढेरों नियम हर साल बनाए जाते हैं। जिसे साल दर साल से रिपीट करते आ रहे हैं लेकिन असल बात ये है की लोगों को आज तक जन जागरूकता लाने में वन विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हुए
हैं ।
इन दिनों गरियाबंद वन मंडल के कई वन परिक्षेत्र भीषण आग की चपेट में है। जिससे छोटे-छोटे पौधे तो नष्ट हो रहे हैं व छोटे छोटे जीव जंतु काल के गाल में समा रहे हैं ।वन अधिकार पट्टा के लालच मे पहले हि जंगल सिमट चुके है और जब कुछ जंगल बचे हैं उसके लिए ढेरों कर्मचारी तो है पर कर्मचारी अपने जिम्मेदारियों को भूल कर केवल सड़क मॉनिटरिंग करने में ही माहिर है। ऐसा ही इन दिनों वन परिक्षेत्र पांडुका और छुरा के जंगलों में भीषण आग लगी है ।जिसे बुझा पाने मे वन विभाग नाकाम साबित हो रहे है ।अब जब जंगलो मे महुआ बीनने वाले आग लगा रहे है। तो हाल हि मे वन विभाग द्वारा कंट्रोल रूम की स्थापना किया गया है ।जिसमे विभाग द्वारा मोबाइल नंबर भी जारी किया गया है ।ऐसे मे विभाग का नियम केवल सफेद हाथी साबित हो रहा है ।लगभग महुआ बीनने की क्रिया चरम पर है और आधे से अधिक जंगल जलकर खाक हो चूके है ।अब कंट्रोल रूम की स्थापना समझ से परे है ।खास कर इन दिनों पांडुका वन परिक्षेत्र व छुरा मे जंगल मे लगी आग पुरी तरह से जंगल को अपने चपेट मे ले रखा है पर यहां के अधिकारी व कर्मचारी हमेशा की तरह केवल खानपूर्ति करने मे लगे है।हालांकि छुरा रेंजर और फिंगेश्वर रेंजर मैदान में उतरकर आग बुझाने प्रयास में लगे है लेकिन उनके कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रहे है।लेकिन ये काफ़ी नहीं है।क्योंकि हर एक व्यक्ति जब तक जंगल और पर्यावरण के प्रति जागरूक नही होंगे तब तक इस धधकती आग को बुझाना आसान नहीं है।इसके लिए वन विभाग को जनजागरण के लिए कड़े प्रयास करने होंगे या फिर जंगल को आग से बचाने वन अधिनियम के कड़े कानून का उपयोग करना होगा।खासकर उन लोगो के लिए इस कानून का उपयोग करना होगा जो आग से जंगल की तबाही को जानते हुए भी जानबूझकर जंगल में आग लगा देते है।क्योंकि जंगल में आग लगाना और पर्यावरण सहित वन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाना बहुत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है जिसके तहत कड़ी सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। जिस तरह से लोग महुवा बिनने के चक्कर में पूरे जंगल में आग लगा रहे है और आग को बिना बुझाए छोड़कर जा रहे है ऐसे में वनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर विभाग को अपने कड़े कानून का उपयोग करना होगा तभी लोग सुधर पाएंगे।अन्यथा जंगल के विनाश को कोई रोक नहीं पाएगा।आज के इस आधुनिक युग में लोग वनों के प्रति सजग नही है जो गंभीर चिंता का विषय है।अब जरूरत है विभाग को इस ओर गंभीर कदम उठाकर कार्यवाही करने की।आज जब हमारी मीडिया की टीम छुरा वन परिक्षेत्र के अमेठी सर्कल के करपीदादर और वन लोहझर पहुंचे तो चारो तरफ जंगल में आग ही आग फैला दिखाई दिया।लेकिन इसे बुझाने एक भी जिम्मेदार दिखाई नही दिया।

फिर मीडिया की टीम को आग बुझाने मैदान में उतरना पड़ा।4 घंटे कड़े मशक्कत के बाद आग पर तो काबू पा लिया गया।लेकिन जब आगे बढ़े तो दृश्य भयवाह था।जंगल जलकर खाक हो गया था।जिसकी जानकारी गरियाबंद डीएफओ मयंक अग्रवाल को भी दिया गया।वही छुरा रेजर एसडी दीवान ने इस भयावह स्थिति को देखते हुए अपने स्टॉफ के साथ मीटिंग कर रणनीति बनाकर ठोस कदम उठाने की बात कही।तो इसकी जानकारी डीएफओ को भी दिया गया है।अब देखना ये होगा की विभाग के आला अधिकारी वनों की सुरक्षा को लेकर क्या गंभीर कदम उठाते है और क्या कार्ययोजना तैयार करते है।

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