पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद वहां बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी का कोई बयान नहीं आया है. कोरोना को लेकर एक के बाद एक तमाम विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्री और नेता उन पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी चुप हैं. यहां तक कि उनके अपने समर्थक भी पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद से बौखलाए हुए हैं और मोदी को भला-बुरा कह रहे हैं, तब भी मोदी ने अपनी खामोशी तोड़ी नहीं है. आखिर मोदी की इस चुप्पी का राज क्या है, जो देश-दुनिया में जाने जाते हैं अपने आक्रामक अंदाज और बयानों के लिए. लेकिन मोदी की राजनीति पर बारीक निगाह रखने वालों के लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है. मोदी चुप्पी को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और पूरी तैयारी कर पहला मौका मिलते ही हिसाब-किताब बराबर कर लेते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबके निशाने पर हैं, क्या विरोधी और क्या समर्थक. पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार सत्ता की बागडोर संभालते ही ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी तो ठीक, टूटे-बिखरे-पस्त विपक्ष ने भी दीदी में रानी लक्ष्मीबाई की कल्पना करनी शुरु कर दी है, जो 2024 में मोदी को केंद्र से उखाड़ फेंकेगी. मोदी से खुन्नस का आलम ये है कि जिस कांग्रेस पार्टी को बंगाल में एक भी सीट नहीं मिली, उसके भी कर्णधार राहुल गांधी ममता को बधाई देने में लगे हुए हैं, क्योंकि ममता ने पश्चिम बंगाल पर बीजेपी का कब्जा नहीं होने दिया. शिवसेना की भी खुशी छिपाये नहीं छुप रही.
पश्चिम बंगाल में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर क्यों चुप हैं मोदी
मोदी पर खुद के समर्थकों का भी काफी दबाव है. सोशल मीडिया के सुपरस्टार मोदी खुद हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसी पर गालियां पड़ रही हैं, उनके हार्डकोर समर्थक उन्हें लानतें भेज रहे हैं, आखिर उन्होंने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का शपथ ग्रणण होने देने की जगह वहां राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं लगाया. बकायदा इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया जा रहा है कि अगर बीजेपी की जगह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई होती और इंदिरा पीएम होंती तो किस तरह से अभी तक पश्चिम बंगाल में ममता शासन की जगह राष्ट्रपति शासन लगा होता और टीएमसी के गुंडों को सबक सिखाया जा चुका होता, जिन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की है, लूट मचाई है और यहां तक कि महिलाओं के साथ बलात्कार और विभत्स अत्याचार किये हैं.
विपक्ष उड़ा रहा है मजाक, लेकिन मोदी हैं चुप
जिस मोदी के बारे में मशहूर है कि उनकी आंखों से निकलने वाली आग को बर्दाश्त करना सबके बूते की बात नहीं है, उनको वो नेता और मुख्यमंत्री भी आंख दिखा रहे हैं, जिन्हें खुद राजनीति में पांव रखे जुम्मा-जुम्मा चार दिन नहीं हुए हैं और अपनी जमीन ही तलाशने में लगे हुए हैं, तब भी पीएम मोदी पर सभी संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए छींटाकशी कर रहे हैं. ताजा उदाहरण झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का है, जिन्हें पीएम मोदी ने कल फोन किया कोरोना के सामने साझी लड़ाई को लेकर, लेकिन आभार मानने की जगह सोरेन ने कह दिया कि मोदी हमेशा मन की बात करते हैं, काम की कोई बात करते नहीं हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तो पीएम मोदी के सामने अनाप-शनाप बयान और हरकतों के लिए मशहूर ही हैं. ज्यादा समय नहीं बीते, जब सारे प्रोटोकॉल को किनारे रखते हुए पीएम मोदी से तमाम राज्यों के सीएम वाली बैठक के दौरान अपनी स्पीच को चुनावी अंदाज में डिलिवर करते हुए केजरीवाल ने उसे लाइव प्रसारित भी करवा डाला
कोरोना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के निशाने पर हैं मोदी
देशी-विदेशी मीडिया भी पिछले कई महीनों से पीएम मोदी को निशाने पर लिए हुए है. लगातार लाशों के अंबार को दिखाते हुए मोदी सरकार की विफलता की चर्चा करते हुए मोदी के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किये जा रहे हैं. बहुत सारे विश्लेषक तो ये भी बड़ी हिम्मत से कहने लग गये हैं कि मोदी का सितारा अब अस्ताचल की तरफ है, कोरोना ने मोदी का भविष्य सील कर दिया है और 2024 में देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा..