कम बारिश की आशंका के बीच कृषि विभाग की किसानों को सलाह, धान के बजाय दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन

रायपुर। इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड और कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। इसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार संभावित अल्पवर्षा की स्थिति में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलें अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। इन फसलों को कम पानी की आवश्यकता होती है और प्रतिकूल मौसम में भी इनकी पैदावार अपेक्षाकृत बेहतर रहती है।

विभाग का कहना है कि अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन और तिलहन की बुआई करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उपज का उचित मूल्य मिलने की सुविधा रहेगी।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक दलहन और तिलहन फसलें आर्थिक लाभ के साथ-साथ भूमि की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे आगामी फसलों के उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण इन फसलों से किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है।

कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले किसानों को भी कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करने की सलाह दी है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

विभाग ने किसानों से मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। विभाग का मानना है कि समय पर सही फसल चयन कर किसान संभावित सूखे के प्रभाव को कम करने के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं।

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