महात्मा गांधी के गुरु थे गोपाल कृष्ण गोखले, जयंती पर जानें उनके जीवन से जुड़ी ख़ास बातें
नई दिल्ली:
गोपाल कृष्ण गोखले पर महादेव गोविंद रानाडे का प्रभाव था. उन्होंने एक बार कहा था मैं रानाडे साहब के साथ मिलकर गलत काम करके भी संतुष्ट हूं, पर उनसे अलग होकर मैं कोई काम नहीं करूंगा. बता दें कि रानाडे गोपाल कृष्ण गोखले के गुरु थे और गांधी जी उन्हें अपना गुरू मानते थे. गोखले एक ऐसे राजनैतिक विचारक थे जो राजनीति में अध्यात्मिक अवधारणा लेकर आए हुए थे. गोखले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने स्वदेशी विचार पर ज़ोर दिया.
गोपाल कृष्ण गोखले हिंदू,मुस्लिम एकता को भारत के लिए कल्याणकारी मानते थे. उनका कहना था कि बहुसंख्यक होने और शिक्षा की दृष्टि से उन्नत होने के कारण हिंदुओं का कर्तव्य है कि सामान्य राष्ट्रीयता की भावना विकसित करने में अपने मुस्लिम भाइयों कि सहायता करे. जिन्ना को वे हिंदू,मुस्लिम भाईचारे का सबसे बड़ा पैरोकार मानते थे. गांधी जी के साथ-साथ गोखले जिन्ना के भी राजनैतिक गुरु थे. बाद में गोपाल कृष्ण गोखले मधुमेह, दमा जैसी कई गंभीर बीमारियों से परेशान रहने लगे थे. जिसके बाद 19 फरवरी, 1915 ई. को मुम्बई, महाराष्ट्र में उन्होंने अपना देह त्याग दिया.



