केलो डैम के 6 गेट खुले, सूचना लेट – चक्रपथ डूबा और रायगढ़ भीषण जाम में फंसा, तालमेल पर उठे सवाल

समय पर सूचना नहीं, तैयारी शून्य – चक्रधर नगर और कलेक्ट्रेट ओवर ब्रिज पर घंटों जाम में फंसे स्कूली बच्चे और एंबुलेंस, जाम लगने के बाद एड़ी-चोटी का जोर लगाता रहा यातायात अमला

भारी बारिश के कारण केलो डैम में जल भराव बढ़ने से जिला प्रशासन ने आज डैम के 6 गेट खोल दिए। गेट खुलते ही केलो नदी का जलस्तर उफान पर आ गया और शहर का चक्रपथ मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गया। चक्रपथ डूबते ही यातायात का सारा दबाव चक्रधर नगर रोड और कलेक्ट्रेट जाने वाले ओवर ब्रिज पर आ गया और शहर भीषण जाम में फंस गया।

ओवर ब्रिज पर हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। कार, बस, पिकअप, सैकड़ों बाइक एक-दूसरे में उलझी रहीं। इस जाम में स्कूली बच्चों से भरी बसें घंटों फंसी रहीं, बच्चे भूखे-प्यासे बिलखते रहे। मरीज लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई, जिसे निकलने के लिए लोगों को खुद मशक्कत करनी पड़ी।

अब यहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है, जिसे शहर की जनता पूछ रही है। सवाल यह है कि अगर जिला प्रशासन ने समय पर डैम खोलने की सूचना दे दी थी, तो यातायात विभाग कहां सोया हुआ था? पहले से वैकल्पिक व्यवस्था, डायवर्जन प्लान या अतिरिक्त बल की तैनाती क्यों नहीं की गई?

और यदि यातायात विभाग को समय पर सूचना ही नहीं मिली, तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही है। जब पता है कि चक्रपथ डूबते ही शहर की पूरी यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है, तो 12 से 24 घंटे पहले सूचना क्यों नहीं दी गई?

जानकारी के अनुसार ट्रैफिक डीएसपी खुद 11 बजे से रेलवे फाटक के पास पूरी टीम और आरपीएफ के साथ एड़ी-चोटी का जोर लगाते नजर आए। जनता पूछ रही है कि यह जोर जाम लगने से पहले क्यों नहीं लगाया गया?

सामान्य दिनों में भी काशीराम चौक, चक्रधर नगर चौक, मिनीमाता चौक, कलेक्ट्रेट मार्ग शनि मंदिर जैसे दबाव वाले मार्गों पर यातायात व्यवस्था केवल सिग्नल के भरोसे चलती है। ऐसे में अचानक बढ़े दबाव को संभालने की तैयारी कैसे होती? शहरवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सूचना और तैयारी होती, तो आज इस भीषण जाम का सामना नहीं करना पड़ता।

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