कोरोना काल में भी जारी है एड्स की काउंसिलिंग

इस साल अब तक 14,400 टेस्ट में से मिले 34 मरीज

विश्व एड्स दिवस: 1 दिसंबर को कला जत्था का एड्स जागरूकता कार्यक्रम

रायगढ़ 30 नवंबर 2021

दुनियाभर में हर साल एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है। इस बार विश्व एड्स दिवस 2021 की थीम ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स खत्म करें’ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस साल का मुख्य एजेंडा दुनिया भर में आवश्यक एचआईवी सेवाओं तक पहुंच में बढ़ती असमानताओं को उजागर करना है। इसमें आगे कहा गया है कि विभाजन, असमानता और मानवाधिकारों की अवहेलना उन विफलताओं में से हैं जिन्होंने एचआईवी को वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनने और बने रहने दिया। डब्ल्यूएचओ यह भी कहता है कि अब कोविड-19 सेवाओं में असमानता और व्यवधान को बढ़ा रहा है, जिससे एचआईवी ग्रस्ति कई लोगों का जीवन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

बीते साल की तरह इस बार भी कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जिले में व्यापक स्तर पर एड्स के प्रति के लिए जागरूकता कार्यक्रम में कमी आई है। पर स्वास्थ्य विभाग ब्लॉक स्तर पर छोटे-छोटे कार्यक्रम जरूर आयोजित कर रहा है।

जिला एड्स नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. टीके टोंडर ने बताया शहरी क्षेत्र में 1 दिसंबर को दोपहर कमला नेहरू उद्यान में एड्स कला जत्था द्वारा जनजागरूता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जो जिंदल स्टील एंड पावल लिमिटेड के सीएसआर विभाग, नेहरू युवा केंद्र पीआई ( एड्स के लिए विशेषरूप से कार्य करने वाले) समूह के सहयोग से किया जा रहा है।

इस साल कोरोना संक्रमण के समय में भी 14,400 से अधिक लोगों की काउंसलिंग की जा चुकी है और इनमें से सभी का टेस्ट कराया गया है जिनमें से 34 लोगों का रिजल्ट पाजिटिव आया और सभी को लिंक कर दिया गया है।

काउंसिलिंग में आने वाले सभी लोगों को यह बताया गया कि एड्स के प्रति जागरूकता ही एकमात्र बचाव है क्योंकि एड्स की बीमारी का काफी देर बाद पता चलता है और मरीज भी एचआईवी टेस्ट के प्रति सजग नहीं रहते, इसलिए अन्य बीमारी का भ्रम बना रहता है। इस गंभीर समस्या से बचाव का सबसे पहला चरण एड्स के लक्षण पहचानना है। एड्स का पूरा नाम है ‘एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम’ होता है।

तीन टेस्ट के बाद आता है परिणाम
इंटीग्रेटेड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आइसीटीसी) रायगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार एचआइवी की संभावना वाले व्‍यक्ति को तीन तरह का टेस्‍ट कराना पड़ता है। इससे ही उसके पॉजिटिव या निगेटिव होने की पुष्टि होती है। अगर वह व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो उसका नियमित तरीके से इलाज शुरु किया जाता है। संक्रमित व्यक्ति के बारे में किसी को नहीं बताया जाता है। इसको गुप्त रखा जाता है।

कोरोना काल में घबराएं नहीं लोग : नोडल अधिकारी डॉ. टोंडर
जिला एड्स नियंत्रण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. टीके टोंडर ने बताया एड्स के प्रति लोगों को जागरुक किया जा रहा है। एड्स का बचाव ही इसका इलाज है। सरकार व विभाग इसके रोकथाम के लिए बेहद सजग है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पुरुषों के लिए कंडोम की व्यवस्था भी की गई है। असुरक्षित यौन संबंध से बचना है और सजग रहना है। सभी जगहों पर इसकी जांच की जाती है। संक्रमित मरीजों को मुफ्त दवा दी जा रही है। डॉ. टोंडर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में भी एड्स नियंत्रण की पूरी टीम सक्रिय है। “हम काउंसिलिंग के सदैव तैयार हैं लोगों को किसी भी प्रकार से हिचकना नहीं है,’’ ड टोंडर कहते है ।

इस साल अब तक मिले 34 मरीज
जिला एड्स नियंत्रण समिति से मिले आंकड़ों के अनुसार बीते 11 सालों में जिले में 403 एड्स के मरीज मिले हैं। इनमें से 311 लोगों को लिंक कराया जा सका है यानी दवा चालू हो गई है। सबसे पहले आईसीटीसी में रजिस्ट्रेशन होता है फिर एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी ) लिंक बनता है। मेन एआरटी बनने के बाद उसे 6 महीने की दवा मिलती है, जिले से लिंक हो जाने का अर्थ है एंटी रेट्रोवायरस थेरेपी चालू हो गया है यानी मरीज को नियमित रूप से दवा मिलने लगी है। विभाग की माने तो टेस्ट में पॉजिटव मिले मरीजों को 100 फीसदी लिंक करना है लेकिन कुछ लोग गलत पता दे देते हैं और जानबूझकर लिंक नहीं कराते हैं ऐसे मरीज़ रह जाते हैं।

क्रम संख्या वर्ष एचआईवी काउंसिलिंग टेस्ट पॉजिटिव लिंक

1. 2010-11 – 7456-6952- 16-16

  1. 2011-12 9060- 8569
    -14-11
  2. 2012-13 14080 13947 38 25
  3. 2013-14 25522 24465
    34 21

5 2014-15 27941 27364
48- 32

  1. 2015-16 12848 10856
    25-22
  2. 2016-17 14570 14318
    35- 21
  3. 2017-18 16203-14809
    57- 38

9 2018-19 28883 28826
50-43

10.2019-20 27646 27646
52-48

  1. 2021-22 14400 14400
    34-34

सालभर जागरूकता और जांच दोनों : तरुण बघेल
जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के सीएसआर विभाग के तरुण बघेल बताते हैं कि एड्स के लिए उनकी कंपनी बेहद संजीदा है जो जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्य करती है। जिंदल फाउंडेशन के तहत एड्स की स्क्रीनिंग सालभर चलती रहती है। ट्रक के साथ उनके ड्राइवर-खलासी, अप्रवासी मजदूरों की नियमित जांच, परामर्श और उनमें कंडोम का वितरण लगातार किया जाता है। एड्स को जानना और उससे बचाव ही एकमात्र इसका इलाज है। हर महीने स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाले मेडिकल वैन से जिंदल ट्रांसपोर्ट नगर में लोगों की जांच की जाती है। हायर सेकेंडरी स्तर के बच्चों की स्कूल में और कॉलेज के छात्रों की भी काउंसिलिंग हम करते हैं। एड्स के प्रति जागरूकता के लिए जिंदल फाउंडेशन सालभर कार्य करता है।

विश्व एड्स दिवस पहली बार 1988 में मनाया गया था। हर साल, दुनिया भर के संगठन और लोग एचआईवी महामारी की ओर ध्यान दिलाते हैं, एचआईवी जागरूकता और ज्ञान को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हैं, एचआईवी के बारे में बात करते हैं, और बढ़ती प्रतिक्रिया को रोकने के लिए कदम उठाते हैं।

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