कोल लेवी घोटाले में सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर, 9 मई 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले मामले में कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के कथित करीबी सहयोगी और ड्राइवर नारायण साहू की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी केवल ड्राइवर नहीं, बल्कि पूरे कथित वसूली नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था।


दो साल से फरार था आरोपी

ईओडब्ल्यू के अनुसार नारायण साहू करीब दो वर्षों से फरार चल रहा था। एजेंसी ने उसे लगभग दो महीने पहले गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी कोल लेवी से जुड़े कथित अवैध वसूली नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और पैसों के कलेक्शन तथा ट्रांसफर का काम संभालता था।


विशेष अदालत से भी खारिज हुई थी जमानत

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया था। इसके बाद नारायण साहू ने पहले ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में जमानत याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

बाद में उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया कि वह केवल कारोबारी का ड्राइवर था और मामले में उसे झूठा फंसाया गया है।


राज्य शासन ने किया जमानत का विरोध

राज्य शासन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि जांच में आरोपी की भूमिका गंभीर पाई गई है। एजेंसी के मुताबिक नारायण साहू कथित कोल लेवी सिंडिकेट के जरिए करीब 13 करोड़ रुपये की अवैध नकद वसूली में शामिल था।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था।


हाईकोर्ट ने माना- पर्याप्त सबूत मौजूद

सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जांच एजेंसियों के पास आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त और गंभीर साक्ष्य मौजूद हैं।

कोर्ट ने कहा कि नारायण साहू कथित वसूली नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था और सूर्यकांत तिवारी का भरोसेमंद व्यक्ति था।

जांच के दौरान जब्त हैंडरिटन डायरी में भी आरोपी के नाम से कई एंट्रियां मिलने का दावा किया गया है, जिनसे करोड़ों रुपये के लेन-देन का लिंक सामने आया है।


जमानत देने से किया इनकार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है और ऐसे में उसे जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

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