क्या शिल्पा अग्रवाल के ट्रांसफर को लेकर कलेक्टर एमसीबी दबाव मे हैं ?क्यों नहीं कर पा रहे मुख्यमंत्री के आदेश का पालन ?

रिपोर्टर – रईस अहमद

मनेन्द्रगढ़ – जिस परवेक्षक महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी शिल्पा अग्रवाल की हम बात कर रहे हैं वह लगभग एक ही विभाग के एक ही पद पर लगभग 14 साल से बनी हुई है और नियमों को ताख पर रखकर गृह ग्राम में उनकी पदस्थापना भी हुई है । उनकी राजनीतिक पहुंच का अंदाज़ा हम इस बात से भी लगा सकते हैं कि सिर्फ एक पर्यवेक्षक परियोजना अधिकारी शिल्पा अग्रवाल का ट्रांसफर करने के लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर मात्र एक ट्रांसफर लेटर जारी किया गया लेकिन जिला एमसीबी के कलेक्टर को मात्र एक पर्यवेक्षक को उसके कार्य से भारमुक्त करने के लिए पसीने छूट गए। न सिर्फ कार्य से भारमुक्त करने मे पसीने छूटे बल्कि महिला पर्यवेक्षक को बचाने के लिए दबाव के कारण तरह-तरह की जुगत भी करने पड़ रहे हैं। अब यह तो कलेक्टर ही बता सकते हैं कि उन पर किस मंत्री या नेता का दबाव है ?

  • अब तक नहीं किया कार्य से गया भारमुक्त क्यों ?
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ट्रांसफर लेटर आने के बाद पहले तो कलेक्टर महोदय ने बहाना बनाया कि हमारे पास कोई परियोजना अधिकारी नहीं है। जिस पर राज्य शासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एक महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी पद्मजा सिनहा को मनेन्द्रगढ़ नियुक्त किया। लेकिन जिला परियोजना अधिकारी एवं कलेक्टर महोदय ने ना तो शिल्पा अग्रवाल को उनके कार्य से भार मुक्त किया और ना ही अरियोजना अधिकारी पद्मजा सिनहा को पदभार संभालने दिया गया है। नतीजतन जिला महिला बाल विकास अधिकारी राजकुमार खाती को राज्य शासन ने तत्काल निलंबित कर दिया और उनपर विभागीय जांच भी बैठा दिया।एवं निलंबन के अवधि में जिला महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के रूप में राजनंदगांव भेज दिया गया।
  • शिकायत के बाद मोटे रकम की वसूली।
    पर्यवेक्षक शिल्पा अग्रवाल के विरुद्ध महिला बाल विकास के कार्यकर्ताओं ने मंत्रालय में लिखित शिकायत की थी। नौबत यहां तक आ चुकी थी कि पर्यवेक्षक शिल्पा अग्रवाल के तानाशाही रवैया से एक महिला कार्यकर्ता आत्महत्या तक करने पर विवश हो गई थी। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि पर्यवेक्षक शिल्पा अग्रवाल अपने ही कार्यालय में पदस्थ बाबू और ऑपरेटर के खिलाफ षडयंत्र पूर्वक शिकायत करवाती है फिर उनसे सेटलमेंट के नाम पर मोटा रकम मांगती है।
  • करोड़ों के भ्रष्टाचार में संलिप्तता।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महिला बाल विकास की कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया है कि उनके द्वारा शासन से प्रदान किए जाने वाले सामग्रियों में जिन्हें आम जनता में निशुल्क वितरण करना होता है उन सामग्रियों को भारी मात्रा में चोरी कर बेचा गया है और करोड़ो का भ्रष्टाचार किया गया है एवं उनको रेडी टू ईट,अंडा,दूधजैसी सामग्रियों को कम मात्रा में दी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button