क्रमोन्नति वेतनमान मामले में 14 शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत नहीं, याचिकाएं खारिज
बिलासपुर, 15 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी जिले के 14 शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान के मामले में राहत देने से इनकार करते हुए उनकी रिट याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही स्पष्ट निर्णय दे चुकी है, इसलिए वर्तमान मामलों में अलग से राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
याचिकाकर्ताओं में धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड में पदस्थ शिक्षक भुवन लाल बैस, संजय कुमार साहू, मितेश कुमार पाल, लीला राम साहू, लक्ष्मी साहू सहित अन्य सहायक शिक्षक और व्याख्याता (एलबी) शामिल थे। उन्होंने राज्य शासन के 10 मार्च 2017 के परिपत्र के तहत क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं मिलने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
शिक्षकों का कहना था कि वे शासन के परिपत्र के अनुसार क्रमोन्नति वेतनमान के पात्र हैं, लेकिन विभाग द्वारा लाभ देने से इनकार किए जाने के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि सभी याचिकाओं में तथ्य और कानूनी प्रश्न समान हैं, इसलिए सभी मामलों की एक साथ सुनवाई कर एक ही आदेश पारित किया जा रहा है।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी प्रकार का विवाद पूर्व में स्मृति आभा नामदेव एवं अन्य बनाम राज्य शासन प्रकरण में तय किया जा चुका है। उस मामले में हाईकोर्ट ने 13 मार्च 2026 को पुष्पलता माणिकपुरी एवं अन्य बनाम राज्य शासन के फैसले का अनुसरण करते हुए स्पष्ट किया था कि संबंधित कर्मचारी स्मृति सोना साहू प्रकरण जैसी परिस्थितियों में नहीं आते, इसलिए उन्हें 10 मार्च 2017 के परिपत्र का लाभ नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने माना कि जब डिवीजन बेंच इस विषय पर पहले ही स्पष्ट निर्णय दे चुकी है, तब उसी के अनुरूप वर्तमान याचिकाओं का निराकरण किया जाना उचित होगा। इसी आधार पर धमतरी जिले के 14 शिक्षकों की सभी रिट याचिकाएं खारिज कर दी गईं।



