चौहान समाज ने आदिवासी में बहाली के लिए पुरजोर मांग करते हुए सांसद महोदया को ज्ञापन सौंपा
अशोक सारथी, आपकी आवाज न्यूज धौंराभांठा:-

इस सम्मेलन में सांसद महोदया के प्रतिनिधि को अपने हक आदिवासी बहाली की मांग के लिए चौहान समाज ने अपने समाज के बारे में विस्तृत रूप में बताया कि सन् 1949-50 में मध्यप्रांत में बरार सरकार द्वारा आदिसूची के क्रम संख्या 36 व 39 में गंड़वा / गांड़ा उल्लेख था जिसका लाभ चौहान समाज को 1956 तक प्राप्त होता रहा है । मध्यप्रांत बरार सरकार द्वारा 01 नवम्बर 1956 में मध्यप्रदेश का गठन हुआ । तब मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जन जाति व अनुसूचित जाति सूची जारी किया गया जिसमें चौहान जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया जो अनुसूची क्र 0 25 में गांड़ा . गांड़ी के उल्लेख है तथा गडावा . गंड़वा को अनुसूचित जनजाति की सूची ( 15 ) में शामिल कर दिया गया है तब से गांड़ा गांडी जाति को अनुसूचित जाति माना गया है जबकि ये दोनो जातियां 1949 अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल थी । गांड़ा समाज का अन्य अपभ्रंश जाति जैसे गडवा , गदवा, पठारी , नेगी , प्रधान आदि जातियां वर्तमान में छ.ग. में अनुसूचित जनजाति सूची में है जबकि गांड़ा जाति को ही अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित किये है । गडवा , गडावा , गदवा अनुसूचित जनजाति के समान ही गांड़ा जाति समनार्थी शब्द है । यह जाति लगभग छ. ग. प्रदेश के समस्त जिलों में पायी जाती है जिसमें बस्तर , कवर्धा , कोरिया , राजनंदगांव रायगढ़ , सरगुजा इत्यादि है । हाल में ही राजनांद के तात्कालिक सांसद माननीय मधुसुदन यादव द्वारा कहा गया कि चौहान समाज के लोगों को लंबित आदिवासी का लाभ अवश्य मिलना चाहिए । साथ ही मोदी कैबिनेट ने आदिवासीयों को बड़ी सौगात दी है । कैबिनेट ने राज्यों की कई जातियों को अनुसूचित जन जातियों की सूची में शामिल किया है । इन 5 राज्यों में छ.ग., हिमाचल प्रदेश , कर्नाटक , तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल है । आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेत्रित्व में मंत्री परिषद की बैठक हुई । इस बैठक में सम्मानीय अर्जुन मुंडा जी द्वारा अवगत कराया गया कि छ.ग. में कुल अधिसूचित 42 जन जातियां है और इनमें से 11 जनजातियों में पर्यायवाची शब्द के रूप में जोड़े गये हैं जिनमें से कमांक 15 में गंड़वा व गदवा को रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार अनुसूचित जन जाति में शामिल किया गया , जो कि गंड़वा व गदवा शब्द चौहान समाज के गांड़ा शब्द का अपभ्रंश शब्द है । इस मामले को पूर्व में चौहान समाज रायगढ़ का नेत्रित्व करते हुए सम्मानीय बी० आर० चौहान ने आदिवासी में वापसी हेतू शासन को गुहार लगाया था जो कि आवेदन शासन के सांसद पटल में लंबित है । उपरोक्त सभी कथनों को सुनकर सम्मेलन के अंत में विशिष्ठ अतिथि सत्यानंद राठिया पूर्व मंत्री छ.ग. शासन एवं गोकुलानंद पटनायक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता द्वारा चौहान समाज को संबोधित किया गया एवं चौहान समाज उनके हक का आदिवासी में बहाली मांग को समर्थन करते हुए चौहान समाज का शासन के पास लंबित आवेदन को ओपन कर आदिवासी बहाली का आश्वासन दिया।



