जमीन बंटवारे के विवाद में खूनी संघर्ष: पिता-पुत्र को न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के रैरुमाखुर्द चौकी क्षेत्र में जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर एक सनसनीखेज हत्याकांड का मामला सामने आया है। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पिता-पुत्र को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?

घटना 20 से 22 जनवरी 2023 के बीच रैरुमाखुर्द चौकी क्षेत्र की है। मृतक सबल साय के पिता की मृत्यु के बाद परिवार की भूमि पर उसके चाचा समारू मांझी का नाम भी दर्ज हो गया था, तभी से आरोपी समारू मांझी जमीन बंटवारे की बात को लेकर मृतक से अक्सर लड़ाई-झगड़ा करता था।
घटना के दिन आरोपी समारू मांझी (55 वर्ष) और उसके पुत्र श्रवण उर्फ संचय मांझी (35 वर्ष) ने मृतक सबल साय को शराब पिलाई। नशे की हालत में जब सबल साय अपने घर के आंगन में सो रहा था, तब आरोपी पिता-पुत्र वहां पहुंचे।

लकड़ी की फाली से हमला कर रस्सी से घोंटा गला

जब मृतक की पत्नी ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उसे भी जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वह डरकर अरहर की बाड़ी में जाकर छिप गई। इसके बाद आरोपी पिता-पुत्र ने मिलकर सबल साय पर लकड़ी की फाली से बेरहमी से मारपीट की और प्लास्टिक की रस्सी से उसका गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद शव को आंगन से खींचकर बरामदे में ले जाया गया।

न्यायालय का फैसला

मृतक की मां और पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य एकत्रित किए और आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 323, 506 के तहत चालान पेश किया।
मामلا की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी समारू मांझी और उसके पुत्र श्रवण को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 1-1 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से मृतक के आश्रितों को 1 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने की भी अनुशंसा की है। इस प्रकरण में शासन की ओर से पक्ष अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने रखा।

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