जशपुर में स्कूल बसों का महा-निरीक्षण: नए शिक्षा सत्र से पहले 15 बसों की फिटनेस, सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस और ड्राइवरों के स्वास्थ्य की हुई गहन जांच

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नए शैक्षणिक सत्र (School Academic Session) की शुरुआत से ठीक पहले स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए जिला पुलिस, परिवहन विभाग (RTO) और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ा मोर्चा खोला है। रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) जशपुर में एक विशेष ‘स्कूल बस जांच एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर’

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का आयोजन किया गया। इस शिविर में जिले के विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूलों में संचालित **15 स्कूल बसों** के फिटनेस, दस्तावेजों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों की बेहद बारीकी और कड़ाई से जांच की गई।

एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर चला अभियान, खंगाले गए गाड़ियों के दस्तावेज

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. लाल उमेद सिंह के कड़े और सीधे निर्देशन में आयोजित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य नौनिहालों के सुरक्षित आवागमन को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना था। जांच के दौरान संयुक्त टीम ने बसों के सभी जरूरी कागजातों की फाइलें खंगालीं, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • वाहन का वैध पंजीयन प्रमाण पत्र (RC) और कमर्शियल परमिट
  • परिवहन विभाग द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट और रोड टैक्स क्लियरेंस
  • वैध वाहन बीमा (Insurance) और अपडेटेड प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC)
  • स्कूल बस चालकों के भारी वाहन संचालन वाले ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस (DL)

सुप्रीम कोर्ट के 7 कड़े सुरक्षा मानकों पर कसी गई कमर्शियल बसें

माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Guidelines) द्वारा स्कूली बसों के लिए तय किए गए कड़े सुरक्षा मापदंडों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त टीम ने प्रत्येक बस के भीतर जाकर ऑन-स्पॉट चेकिंग की। इसके तहत निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं और सुविधाओं का भौतिक सत्यापन किया गया: क्र. अनिवार्य सुरक्षा मानक (Safety Checklist) जांच का मुख्य उद्देश्य 1 जीपीएस और सीसीटीवी कैमरा (GPS & CCTV) बच्चों की रियल-टाइम लोकेशन और बस के भीतर की गतिविधियों की निगरानी। 2 स्पीड गवर्नर (Speed Governor) ताकि बस की गति सीमा स्कूल जोन और हाईवे पर निर्धारित स्पीड से अधिक न हो सके। 3 आपातकालीन खिड़की (Emergency Exit) किसी भी हादसे या विपरीत परिस्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए। 4 फर्स्ट एड किट एवं अग्निशमन यंत्र प्राथमिक चिकित्सा की दवाइयां और आग लगने की स्थिति में तत्काल बचाव के लिए।

इसके साथ ही पुलिस की तकनीकी वाहन शाखा ने बसों के मैकेनिकल पार्ट्स जैसे— हेडलाइट, ब्रेक लाइट, स्टीयरिंग प्ले, टायर ग्रिप, क्लच, एक्सीलेटर, सीटों की मजबूती, प्रेशर हॉर्न और रेड रिफ्लेक्टर पट्टियों की भी गहन जांच की। शिविर में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग (Fire Department) के अधिकारियों ने चालकों को बस में शॉर्ट सर्किट या आग लगने की स्थिति में फायर एक्सटिंग्विशर को तुरंत ऑपरेट करने की लाइव ट्रेनिंग भी दी।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने किया ड्राइवरों का नेत्र और बीपी परीक्षण

वाहन की फिटनेस के साथ-साथ उसे चलाने वाले ड्राइवर की मानसिक और शारीरिक फिटनेस को भी प्राथमिकता दी गई। जिला चिकित्सालय जशपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने शिविर में उपस्थित सभी बस चालकों और परिचालकों (कंडक्टरों) का **निःशुल्क नेत्र परीक्षण (Eye Test)** किया, ताकि विजन संबंधी कोई समस्या न हो। इसके अलावा सभी स्टाफ का ब्लड प्रेशर (BP) और शुगर लेवल जांचा गया। यातायात पुलिस और आरटीओ अधिकारियों ने ड्राइवरों को कड़ी हिदायत दी कि वे किसी भी सूरत में नशे की हालत में गाड़ी न चलाएं और बच्चों को बस में चढ़ाते और उतारते समय बस को पूरी तरह रोककर रखें।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. लाल उमेद सिंह

इस व्यापक सुरक्षा अभियान की सफलता पर बात करते हुए जशपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्कूल प्रबंधनों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि बच्चों के परिवहन में किसी भी प्रकार की कोताही या खटारा बसों का संचालन पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पालकों और बच्चों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए परिवहन और पुलिस विभाग का यह संयुक्त चेकिंग व जागरूकता अभियान आने वाले दिनों में भी नियमित रूप से जारी रहेगा।

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