भूपेंद्र गोस्वामी आपकी आवाज़
गरियाबंद आईऐ जाने मां घटारानी की महिमा के बारे में राजधानी रायपुर से 73 किलोमीटर दूर राजिम क्षेत्र गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायत फुलझर के धसकुड़ जंगल में 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जुलाई माह लगते ही यहां झरनों का मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है यहां के हरि भरी वादियां पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
घटारानी की कहानी
मां घटारानी को ग्राम फुलझर के पुर्वज के लोग 50 वर्षों से ही उनके नाम से पुजा अर्चना गांव में ही करते आ रहे हैं। कोई व्यक्ति वस्तु पशु पक्षी गुम होने पर मां घटारानी के नाम से एक नारियल माता रानी के दरबार में चढांते थे जिससे मिलने की संभावना बन जाती थी ऐसी मान्यता है घटारानी का इतिहास सौ साल से भी अधिक पुराना है। निसंतान लोग मां घटारानी के दरबार में मन्नतें मांगते हैं।
आईए जाने घटारानी माता के दरबार में किस पुजारी ने प्रथम दीप प्रज्जवलित की थी
ए पुजारी है ग्राम फुलझर-विकाश खण्ड छुरा से श्री आनंदी यादव घनघोर जंगल में मां घटारानी की पुजा पाठ कर दीप प्रज्जवलित करते थे तब से लेकर आज तक माता रानी के दरबार में कुंवार नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में घटारानी विकास समिति द्वारा दीप प्रज्जवलित किया जा रहा है। सावन और कुंवार माह में यहां मेला लगता है हजारों की तादाद में यहां यात्रियों का आगमन होता है। पहाड़ी और घाट में मां घटारानी का स्थान है इसलिए माता का नाम घटारानी पड़ा पहले इस जंगल को धसकुड़ बोलते थे। छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल घटारानी 2001 से बहुत ही प्रसिद्ध हुआ ।
आईए जाने घटारानी में कौन कौन से मंदिर है।
घटारानी मंदिर,शारदा मंदिर,शिव मंदिर,काली मंदिर, पहाड़ी के ऊपर में लक्ष्मी कुबेर मंदिर है। देखने लायक लोटेश्वर नाथ गुफा फुलझर डेम और वाटर फाल है।
आईए जाने घटारानी जंगल में कौन-कौन से जंगली जानवर निवास करते हैं।
तेंदूए, भालु, नील गाय, जंगली सुअर, हिरण, गौर, हाथी, बन्दर, खरगोश, अजगर, मोर, आदि जंगली जानवर विचरण करते हैं जो पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
घटारानी में छालीवुड फिल्मों की शूटिंग होती है यहां जंगल होने के कारण मोबाइल का नेटवर्क काम नहीं करता है आकाशवाणी रायपुर व्यापारियों का मनोरंजन और ज्ञान का प्रमुख साधन है। घटारानी में गुप चुप चाट और चाय काफी बहुत ही प्रसिद्ध है। तो आप भी आईऐ छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल घटारानी फुलझर आप सभी का हार्दिक स्वागत है।


