कोरोना की दूसरी लहर से भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत सुधार पर ब्रेक लग गया है। इसके चलते एक बार फिर से देश में बेरोजगारी बढ़ी है। वहीं, बाजार में सामानों की मांग घटने से उद्योग जगत ने फैक्टरियों में उत्पादन कम कर दिया है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए राज्य सरकारें रोज नए प्रतिबंधों की घोषणाएं कर रही हैं। इससे अर्थव्यवस्था का पहिया रुकना स्वभाविक है। देश के अधिकांश राज्य कोरोना की दूसरी लहर के बुरी तरह चपेट में हैं। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। इसके चलते अधिकांश बाजार, मॉल, शॉपिंग कम्पलेक्स आदि बंद हैं। बाजार बंद होने संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की जरूरत कम हुई है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। महंगाई के बढ़ने के भी पूरे संकेत मिल रहे हैं और मजदूर बड़े शहरों से पलायन कर रहे हैं।
ऑफिस जॉब के लिए भी नियुक्तियां थमी
कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए कंपनियों ने व्हाइट कॉलर जॉब (ऑफिस और मैनेजमेंट वाली नौकरियां) की हायरिंग रोक दी है। इसके चलते मई में ऑफिस जॉब की हायरिंग में 10 से 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, 31 फीसदी की गिरावट अप्रैल महीने में आई थी। कंपनियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता अपने मौजूदा कर्मियों और कारोबार को कोरोना की दूसरी लहर से बचाना है। इसके चलते वे अभी नई हायरिंग और विस्तार की योजना को ठंडे बस्ते में डाल रही हैं। आने वाले समय में स्थिति में सुधार होने पर फिर से नई निुयक्तियां शुरू करेंगी।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद अधिकांश वाहन कंपनियों के डीलरों ने अपने शोरूम बंद कर दिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 26,500 शोरूम में से 20,000 लॉकडाउन के कारण अभी बंद हैं। इससे वाहन कंपनियों और डीलरों को 20 से 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। वहीं, मई महीने में गाड़ियों की बिक्री 70 से 80 फीसदी तक गिरने का अनुमान है। वहीं, कोरोना संकट के बाद करीब आठ वाहन कंपनियों ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं। इससे उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार मई में ऑटो इंडस्ट्री का प्रोडक्शन 9 महीने के निचले लेवल पर जा सकता है।
विमानन कंपनियों की हालत खस्ता
कोरोना की दूसरी लहर के बाद हवाई यात्रियों की संख्या में बड़ी गिरावट एकदम से आई है। एक अनुमान के मुताबिक, अब तक हवाई यात्रियों की संख्या में करीब 40 फीसदी की गिरावट आ गई है। इससे विमानन कंपनियों की वित्तीय स्थिति फिर से नाजुक होने लगी है। इसका असर दिखाई भी देने लगा है। विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने अपने कर्मचारियों के अप्रैल महीने के वेतन में 50 फीसदी की कटौती कर दी है। वहीं, इंडिगो ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने का फैसला किया है।बेरोजगारी दर 19 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर
कोरोना की दूसरी लहर ने रोजगार बाजार पर बहुत ही बुरा असर डाला है। इसके चलते 9 मई को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी दर 8.67% पर पहुंच गई जो 19 हफ्ते का उच्चतम स्तर है। यह जानकारी सीएमआईई ने दी है। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी बेरोजगारी में 164 फीसदी की चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है और यह 11.72 फीसदी पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि बीते दो महीने में बेरोजगारी दर में तेजी से इजाफा हुआ है।
फैक्टरियों में उत्पादन गिरा
कोरोना की दूसरी लहर और मजदूरों के पलायन से मैन्युफैक्चिरंग सेक्टर पर काफी बुरा असर पड़ा है। सबसे ज्यादा बुरा असर स्टील, स्पंज आयरन और रोलिंग मिल फैक्ट्रियां पर हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्पताल में होने से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है।
मनरेगा में रोजगार के लिए बढ़ा पंजीयन
कोरोना की दूसरी लहर के बाद मजदूरों का पलायन जारी है। इसके चलते मनरेगा में रोजगार के लिए पंजीयन अप्रैल महीने में बढ़कर 4 करोड़ हो गया है। वहीं, मार्च में 3.6 करोड़ श्रमिक मनरेगा में पंजीकृत थे। विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा में पंजीयन बढ़ने से शहरों में उद्योगों को काम के लिए श्रमिक मिलना मुश्किल होगा। इससे आने वाले दिनों में संकट गहराएगा।
सरकार ऑनलाइन जॉब सर्वे करेगी
कोरोना संक्रमण में कमी का इंतजार किए बिना सरकार ने तिमाही जॉब सर्वे ऑनलाइन करने का फैसला किया है। यह फैसला तब आया है जब केंद्र सरकार ने कोरोना के मामले को देखते हुए चार महत्वपूर्ण सर्वे को रोक दिया है। चीफ लेबर कमिश्नर नेगी ने कहा कि हमने ऑनलाइन डाटा इक्ट्ठा करने का फैसला किया है। इसके लिए सर्वे करने वाले लोग फैक्ट्री या कार्यालय का दौरा नहीं करेंगे।
आईआईएम से निकलने वाले को जॉब पक्का
कंपनियों ने अच्छे बिजनेस स्कूल (आईआईएम) से निकले हुए छात्रों को जॉब ऑफर को वापस नहीं लेने का फैसला किया है। कंपनियों का कहना है कि उन्होंने जिन छात्रों को इस साल ऑफर दिया है उन्हें ज्वाइन कराएंगे।