दीपावली से पहले पटाखा बाजार में बारूद के ढेर पर सुरक्षा व्यवस्था! हादसे के इंतजार में बैठे जिम्मेदार अधिकारी?

कहीं टिन शेड और अग्निशमन की व्यवस्था, तो कहीं ज्वलनशील टेंट में सज गईं दुकानें; लाइसेंस, सुरक्षा मानकों और निगरानी पर एसडीएम के जवाबों ने खड़े किए गंभीर सवाल

बिलासपुर। अनिल शुक्ला की रिपोर्ट।

8 नवंबर को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। रोशनी और खुशियों के इस पर्व को यादगार बनाने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बाजार सजने लगे हैं। दीपावली की रौनक में पटाखों की अहम भूमिका होती है, लेकिन यही पटाखा बाजार यदि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर सजाया जाए तो खुशियों का यह त्योहार किसी बड़े हादसे में भी तब्दील हो सकता है। बिलासपुर जिले में पटाखा दुकानों के संचालन को लेकर प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है, तो उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

इस पूरे मामले की पड़ताल के दौरान जिले के अलग-अलग अनुविभागों के एसडीएम से संपर्क कर यह जानने का प्रयास किया गया कि उनके क्षेत्रों में कितने अस्थायी पटाखा दुकानों को लाइसेंस जारी किए गए हैं और सुरक्षा मानकों का पालन कराने के लिए क्या निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। लेकिन अधिकारियों के जवाबों ने प्रशासनिक तैयारियों पर ही सवाल खड़े कर दिए।

बिलासपुर एसडीएम के पास न दुकानों की संख्या का स्पष्ट जवाब, न निगरानी की जिम्मेदारी

बिलासपुर एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी से जब यह पूछा गया कि उनके कार्यालय से कितने अस्थायी पटाखा कारोबारियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं और मुख्यालय से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन किस तरह सुनिश्चित कराया जा रहा है, तो उनकी ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। न लाइसेंस प्राप्त दुकानों की कुल संख्या बताई गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि दुकानों का निरीक्षण कौन करेगा तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जवाबदारी किस अधिकारी की होगी।

चर्चा के दौरान उनका कहना था कि यदि कोई घटना होती है तो व्यवस्था की पूरी जांच कराई जाएगी। इस जवाब ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किसी हादसे के बाद ही करेगा? जब दुर्घटना रोकने के लिए नियम पहले से निर्धारित हैं, तो उनके पालन की जांच घटना होने के बाद क्यों?

मस्तूरी में लाइसेंस जारी नहीं, फिर सड़क किनारे सज गया पटाखा बाजार!

मस्तूरी एसडीएम से चर्चा में बताया गया कि फिलहाल पटाखा दुकानों के लाइसेंस जारी करने का मामला विचाराधीन है और अभी तक किसी व्यापारी को लाइसेंस नहीं दिया गया है। इस पर जब यह ध्यान दिलाया गया कि क्षेत्र में पटाखा दुकानों का बाजार सज चुका है और जयरामनगर स्टेशन रोड से लगे मुख्य मार्ग पर पटाखों की बिक्री भी शुरू हो गई है, जबकि इस स्थान पर सुरक्षा मानकों के अनुरूप बाजार विकसित किए जाने को लेकर सवाल हैं, तो एसडीएम ने जांच कराने की बात कही।

उन्होंने कहा कि यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। सवाल यह है कि जब लाइसेंस जारी नहीं हुए हैं, तब पटाखों की दुकानें किस आधार पर संचालित हो रही हैं? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है या फिर बाजार सजने के बाद ही कार्रवाई की सुध ली जाएगी?

तखतपुर में नियमों के पालन का भरोसा, बिल्हा और कोटा में जवाब का इंतजार

तखतपुर एसडीएम ने चर्चा में बताया कि बिलासपुर मुख्यालय से निर्धारित नियमों के अनुसार ही पटाखा बाजार लगाने के निर्देश सभी पटाखा कारोबारियों को दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यापारी द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं बिल्हा एसडीएम से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। कोटा एसडीएम से भी दुकानों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

इस तरह जिले के अलग-अलग अनुविभागों में पटाखा दुकानों की संख्या, लाइसेंस की स्थिति और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर एकरूपता और स्पष्टता का अभाव दिखाई देता है।

एडवाइजरी में सख्त नियम, जमीन पर टेंट और ज्वलनशील कपड़ों से दुकानें!

मुख्यालय से जारी दिशा-निर्देशों में पटाखा दुकानों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से कहा गया है कि दुकानें रिहायशी क्षेत्रों और बाजारों के समीप नहीं लगाई जाएंगी। दुकानों का निर्माण बांस, कपड़े, रस्सी और टेंट जैसी ज्वलनशील सामग्री से करने के बजाय अज्वलनशील टिन शेड से किया जाना चाहिए।

दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी अनिवार्य है तथा दुकानें एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं बनाई जानी चाहिए। किसी भी पटाखा दुकान के 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित है।

प्रत्येक दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य है। इसके अलावा दुकान के अंदर और बाहर अलग-अलग 100-100 लीटर पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। अग्निशमन वाहन के आवागमन के लिए कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता खुला रखना होगा। दुकानों के सामने बाइक और कार पार्किंग पर भी प्रतिबंध है।

बिजली व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश हैं। तेल अथवा गैस के लैम्प और खुली बिजली बत्ती का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। विद्युत तारों के जोड़ खुले नहीं होने चाहिए तथा मास्टर स्विच में फ्यूज या सर्किट ब्रेकर लगाना अनिवार्य है। दुकानों के पास ट्रांसफार्मर नहीं होना चाहिए और उनके ऊपर से हाईटेंशन लाइन भी नहीं गुजरनी चाहिए।

नगर निगम और होमगार्ड की व्यवस्था के सामने एसडीएम क्षेत्र के बाजारों पर सवाल

शहरी क्षेत्र में नगर निगम और होमगार्ड की निगरानी में पटाखा दुकानों के निर्माण के दौरान इन सुरक्षा मानकों का पालन कराने का प्रयास किया गया है। दूसरी ओर, एसडीएम स्तर से लाइसेंस जारी किए जाने वाले कुछ अस्थायी पटाखा बाजारों में टेंट और ज्वलनशील कपड़ों से दुकानें सजाई गई हैं। कई स्थानों पर अज्वलनशील टिन शेड, अग्निशमन उपकरण और आगजनी से बचाव के जरूरी इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।

यदि इन दुकानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया गया है तो यह महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम नागरिकों, कारोबारियों और आसपास के लोगों की जान को जोखिम में डालने वाला गंभीर विषय है।

हादसे के बाद जांच ही करनी है तो एडवाइजरी जारी करने का औचित्य क्या?

दीपावली पर पटाखा बाजार में हजारों लोगों की आवाजाही होती है। दुकानों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी जाती है। ऐसे में छोटी-सी चिंगारी भी बड़े अग्निकांड का कारण बन सकती है। यदि दुकानों के निर्माण से लेकर अग्निशमन व्यवस्था तक नियमों का पालन नहीं कराया गया, तो किसी अप्रिय घटना के बाद जांच और कार्रवाई का आश्वासन प्रभावित परिवारों के लिए क्या मायने रखेगा?

प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि लाइसेंस जारी करने से पहले दुकानों का भौतिक सत्यापन किसने किया? कितनी दुकानों में अग्निशामक यंत्र और पानी की व्यवस्था उपलब्ध है? तीन मीटर की दूरी और छह मीटर के आपातकालीन रास्ते का पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है? बिना लाइसेंस दुकानें संचालित होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?

सुरक्षा नियम हादसे के बाद जांच की फाइल तैयार करने के लिए नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले उसे रोकने के लिए बनाए जाते हैं। यदि जिम्मेदार अधिकारी केवल दुर्घटना के बाद जांच कराने की बात करेंगे तो फिर इतनी विस्तृत एडवाइजरी जारी करने का औचित्य ही क्या रह जाता है? दीपावली की खुशियां सुरक्षित रहें, इसके लिए प्रशासन को हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल निरीक्षण, नियमों का पालन और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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